{"_id":"61b39526c44c0e2e7974e8b4","slug":"with-the-issue-of-abolishing-caste-reservation-the-demand-of-the-samanya-varg-commission-kept-rising","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: जातिगत आरक्षण को खत्म करने के मुद्दे के साथ उठती रही सामान्य वर्ग आयोग की मांग, झुकी सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: जातिगत आरक्षण को खत्म करने के मुद्दे के साथ उठती रही सामान्य वर्ग आयोग की मांग, झुकी सरकार
Sat, 11 Dec 2021 11:02 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 11 Dec 2021 11:02 AM IST
सार
बाहरी राज्यों के लोगों को सामान्य वर्ग के कोटे में सरकारी नौकरियों में सेंध लगाने से रोकने के लिए एससी और एसटी की तर्ज पर हिमाचली बोनाफाइड होने की शर्त लगाने की मांग आयोग के गठन के मुद्दे के साथ उठाई जाती रही। हिमाचल में मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार की तर्ज पर सामान्य वर्ग आयोग का शीघ्र गठन करने की मांग उठाई जाती रही।
विज्ञापन
आयोग गठन की घोषणा के बाद जश्न।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल में सामान्य वर्ग आयोग की मांग पर पिछले छह महीने से आंदोलन तेज हो गया था। आंदोलनकारियों की मांग थी कि प्रदेश की 75 फीसदी आबादी सामान्य वर्ग की है, लेकिन यह नेताओं की कठपुतली बनकर रह गई है। मांग उठा रहे थे कि जातिगत आरक्षण को जल्द खत्म किया जाना चाहिए। सरकार आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करे। ऐसे मामलों को उचित स्थान पर आयोग के माध्यम से उठाना आसान होगा।
विज्ञापन
एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट को समाप्त करने की मांग उठाते हुए प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस कानून का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे मामलों में पक्ष रखने को आयोग बनना चाहिए। बाहरी राज्यों के लोगों को सामान्य वर्ग के कोटे में सरकारी नौकरियों में सेंध लगाने से रोकने के लिए एससी और एसटी की तर्ज पर हिमाचली बोनाफाइड होने की शर्त लगाने की मांग आयोग के गठन के मुद्दे के साथ उठाई जाती रही। हिमाचल में मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार की तर्ज पर सामान्य वर्ग आयोग का शीघ्र गठन करने की मांग उठाई जाती रही।
विज्ञापन
मानसून सत्र के दौरान भी सवर्ण आयोग की मांग पर शिमला में प्रदर्शन किया गया था। उस समय भी सरकार ने विचार करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरकार को लगा कि मामला शांत हो जाएगा लेकिन इस आंदोलन को बड़ा बना रहे लोगों ने शिमला से लेकर सोलन और कांगड़ा से ऊना जिले तक लोगों को एक सूत्र में पिरो लिया। हाल ही में शिमला से हरिद्वार तक पद यात्रा निकालकर गंगाजल लाया गयाथा और इससे धर्मशाला तक पहुंचाया।
विज्ञापन
कहा कि विधायकों की शुद्धि की जाएगी। इससे सरकार हिल गई। चूंकि सिरमौर, ऊना, बिलासपुर और शिमला जैसे शहरों में एससी-एसटी एक्ट की धाराओं से जुड़े कई ऐसे मामले दर्ज हुए थे जिनमें पीड़ित पक्ष के कथित कानूनी दुरुपयोग की बात सामने आई थी। ऐसे में लोगों का भी समर्थन इस मांग को करने वालों को मिल रहा था। चूंकि जेसीसी की बैठक के बाद पहले से ही पुलिसकर्मियों की नाराजगी से सरकार निपट नहीं पा रही थी। ऐसे में सामान्य वर्ग आयोग ने उनकी मुश्किल को और बढ़ा दिया था।
आयोग की भविष्य की तस्वीर नहीं साफ
सरकार ने भले ही प्रदर्शनकारियों के दबाव में आयोग के गठन की अधिसूचना कर दी, लेकिन अभी तक इसकी रूपरेखा स्पष्ट नहीं हो सकी है। यह साफ नहीं है कि सरकार आयोग का अलग से चेयरमैन नियुक्त करेगी या मुख्यमंत्री को ही इसका अध्यक्ष बनाया जाएगा। साथ ही इसके क्षेत्राधिकार और काम की भी व्याख्या होनी बाकी है। हालांकि, माना जा रहा है कि यह सिविल कोर्ट की तरह काम करेगा।
परमार मंत्रिमंडल में रहे हरिदास के पोते हैं रुमित ठाकुर
सामान्य वर्ग के सामान्य वर्ग आयोग की मांग करते आंदोलन का नेतृत्व हिमाचल के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. परमार के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे हरिदास के पोते रुमित ठाकुर ने किया। उनके नेतृत्व में आंदोलनकारी कई बार सड़कों पर उतरे। अर्की निवासी रुमित ठाकुर के पिता इंद्र सिंह ठाकुर ने भी हिमाचल विकास कांग्रेस से अर्की से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे।
हमारी लड़ाई सवर्ण शब्द से, सीएम को माननी पड़ी हमारी बात
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेशाध्यक्ष रवि कुमार ने कहा है कि उनकी लड़ाई सवर्ण शब्द से है। जो आयोग बनाया गया है, वह सामान्य वर्ग आयोग है। सवर्ण गैर संवैधानिक शब्द है। इससे इतनी बात तो साफ हो चुकी है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भीम आर्मी की बात माननी पड़ी है।