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हिमाचल: विदेशों से आयातित सेब पौधों से बढ़ रहा वायरस का खतरा

Mon, 14 Feb 2022 01:14 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 14 Feb 2022 01:14 PM IST
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virus danger in apple plants imported from foreign countries
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल में निजी क्षेत्र में विदेशों से आयातित सेब के पौधों से बीमारियों और वायरस फैलने का खतरा बढ़ा रहा है। देश के बाहरी राज्यों में निजी नर्सरियां से प्रदेश के बागवानों को गलत तरीके से सेब के पौधे बेच रहे हैं और इन पर बराबर निगरानी  की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे कितने पौधे किस देश से आयात किए जा रहे हैं और कहां बेचे गए हैं। इसे लेकर कोई लेखाजोखा भी नहीं रहता। हालांकि प्रदेश में सरकार से पंजीकृत नर्सरियां भी हैं और उन पर बराबर निगरानी रखने की बात भी कही जा रही है।

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राज्य से बाहर की नर्सरियों के माध्यम से हर साल सीजन में लाखों सेब और अन्य फलों के पौधे विदेशों से आयात कर हिमाचल में बेचे जाते हैं। इन्हें सही तरीके से क्वारंटीन तक नहीं किया जा रहा। ये पौधे कहां से आयात किए गए हैं और कितने आयात किए हैं।
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इन फलदार पौधों को हिमाचल के किन क्षेत्रों में बेचा गया है और बागवान का क्या नाम और पता है। यह कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। विदेशी पौधा साढ़े सात सौ रुपये तक बेचा जाता है। इसकी कोई गारंटी नहीं होती है कि ये बीमारी मुक्त और वायरस मुक्त है भी या नहीं। 
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हिमाचल प्रदेश सब्जी और फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि मामला हर बार प्रदेश सरकार से उठाया जाता रहा है कि निजी क्षेत्र से आयात सेब और अन्य फलदार पौधों के आयात पर सरकार कड़ी निगरानी और रिकॉर्ड रखे। तभी पता चलेगा कि ये आयातित फलदार पौधे बीमारी मुक्त और वायरस मुक्त हैं, या नहीं। विदेशों से आयात फलदार पौधों को आयात करने के बाद एक साल तक क्वारंटीन करना अनिवार्य रहता है। 


बागवानी निदेशक आरके परूथी ने कहा कि प्रदेश की निजी नर्सरियों में आयातित फलदार पौधों पर बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिक और विभाग के उप निदेशक निगरानी रखते हैं।

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