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उम्मीद की मिसाल: देसी चूल्हे पर कद्दू और लौकी की बर्फी बना रोजगार की राह दिखा रहीं अनीता

Mon, 15 Aug 2022 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (नादौन)
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (नादौन) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 15 Aug 2022 05:00 AM IST
सार

अनीता ठाकुर ने बताया कि वह 10 साल से अपने हाथ से बनाए खाद्य पदार्थ कद्दू, पपीते, लौकी और आंवले की बर्फी बिना घी और तेल का इस्तेमाल किए बना रही हैं और इन्हें बेच रही हैं।

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umeed ki mashal anita thakur inspiring story in hamirpur himachal pradesh
अनीता ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इन पंक्तियों को मेहनत के दम पर धरातल पर उतारने में उपमंडल नादौन की ग्राम पंचायत रंगस के गांव जंदली राजपूतां की अनीता ठाकुर सफल रही हैं। वह महिलाओं को स्वावलंबी बनने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं। देसी चूल्हे पर बिना घी और तेल के पपीता, कद्दू, लौकी और आंवले की बर्फी बनाकर माह में तीस हजार रुपये कमा रही हैं।

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एक साल पूर्व महिला के पति का देहांत हो गया था। इसके बावजूद महिला ने हिम्मत नहीं हारी और आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वादिष्ट पकवान बनाना जारी रखा। महिला के बनाए पकवान लोगों को भी खूब पसंद आ रहे हैं। इसके अलावा अन्य स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी इस बारे में प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। वह हमीरपुर के अलावा धर्मशाला, मंडी तथा शिमला जैसे बड़े शहरों में भी प्रदर्शनी में स्टाल के माध्यम से अपने हाथ से बनी परंपरागत मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों को सस्ते दाम पर उपलब्ध करवा चुकी हैं।
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मंडी में लगने वाले सरस मेले और अन्य कई जगहों पर जिला प्रशासन की ओर से उन्हें नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। अनीता ठाकुर ने बताया कि वह 10 साल से अपने हाथ से बनाए खाद्य पदार्थ कद्दू, पपीते, लौकी और आंवले की बर्फी बिना घी और तेल का इस्तेमाल किए बना रही हैं और इन्हें बेच रही हैं। इसके अलावा अनेक प्रकार के अचार व चटनी, सेवियां, मूंग की बढ़ियां और सीरा बनाकर बेच रही हैं।
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सीरा मिष्ठान के साथ-साथ औषधि के रूप में भी घरों में इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, कई बार अन्य महिलाओं को भी रोजगार देकर 400 के हिसाब से दिहाड़ी देकर उनके परिवार के लिए भी रोजी रोटी जुटाने का माध्यम बनी हैं। उन्होंने कहा कि पति के देहांत के बाद पूरी जिम्मेदारी उन पर है और उन्होंने हिम्मत न हारकर अपनी कला को और निखारा और बड़े पैमाने पर उत्पाद बेच रही हैं।


वह राधे कृष्णा स्वयं सहायता समूह के बैनर तले स्टॉल लगाती हैं। पहले कई बार बैंकों से ऋण लेकर कार्य किया। अब वह पूर्ण रूप से आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर हैं। उन्होंने उपायुक्त हमीरपुर से मांग की है कि हमीरपुर बाजार में गांधी चौक के आसपास सप्ताह में दो दिन शुक्रवार और शनिवार के लिए स्टाल लगाने की अनुमति दी जाए, ताकि ऐसी अन्य महिलाएं भी अपनी आजीविका कमाकर आत्मनिर्भर बन सकें और कइयों को रोजगार मिल सके।

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