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Himachal news: जंगलों में बेकार पड़ी सूखी लकड़ी से बनेंगे खिलौने और सजावट का सामान

Sun, 16 Apr 2023 11:53 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 16 Apr 2023 11:53 AM IST
सार

राज्य वन विकास निगम सीमित बर्बाद हो रही इस लकड़ी के इस्तेमाल के लिए एक नीति बनाएगा। इस लकड़ी का इस्तेमाल करके निगम की आमदनी बढ़ेगी, वहीं लोगों को भी घर-द्वार खिलौने, सजावटी सामान और फर्नीचर उपलब्ध हो सकेगा।

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Toys and decorations will be made from dry wood lying useless in the forests
सूखी लकड़ी से बनेंगे खिलौने और सजावट का सामान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के जंगलों में बेकार पड़ी सड़ रही अरबों रुपये की सूखी लकड़ी से अब खिलौने और सजावट का सामान बनेगा। राज्य वन विकास निगम सीमित बर्बाद हो रही इस लकड़ी के इस्तेमाल के लिए एक नीति बनाएगा। इस लकड़ी का इस्तेमाल करके निगम की आमदनी बढ़ेगी, वहीं लोगों को भी घर-द्वार खिलौने, सजावटी सामान और फर्नीचर उपलब्ध हो सकेगा। निगम के नवनियुक्त उपाध्यक्ष केयर सिंह खाची ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही निदेशक बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी। जंगलों में बर्बाद हो रही अरबों रुपये की सूखी लकड़ी के उचित इस्तेमाल के लिए नीति तैयार करने पर मंत्रणा की जाएगी। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी ऐसी लकड़ी का हर तरह के सामान बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। वहां की तकनीक को अपनाने के लिए विशेषज्ञों को हिमाचल प्रदेश में बुलाया जाएगा।

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हिमाचल के लगभग सभी जिलों में जंगल हैं। शिमला, सिरमौर, कुल्लू, किन्नौर, मंडी, चंबा जैसे जिलों में तो देवदार के घने जंगल भी हैं। देवदार की लकड़ी बेशकीमती होती है। इसका इस्तेमाल मकान या भवन बनाने के लिए फर्नीचर के रूप में होता है। हर साल जंगलों में बारिश के मौसम में या भूस्खलन के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ गिरते हैं। ऐसे पेड़ जंगल में ही पड़े-पड़े सड़ जाते हैं या सूख जाते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं होता। एक ओर जहां यह लगातार दोहराया जाता रहा है कि हिमाचल प्रदेश में कमाई के कोई साधन नहीं हैं, तो ऐसे में जंगलों में पड़ी सूखी लकड़ी कमाई का एक बड़ा साधन हो सकती है।
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निगम के उपाध्यक्ष खाची ने कहा कि राज्य के जंगलों में सूखी गिरी पड़ी लकड़ी ठीक उस तरह से है, जैसे कस्तूरी मृग की नाभि में कस्तूरी होती है, मगर उसकी सुगंध खोजते-खोजते वह भटकता फिरता है। प्रदेश की इस बेशकीमती लकड़ी को सही तरीके से इस्तेमाल करने के बजाय इसे सड़ने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व की कांग्रेस सरकार इस संबंध में गंभीर हो गई है। इस लकड़ी का समुचित उपयोग होगा। जिस लकड़ी से फर्नीचर बनाया जाना है, उसे उसी रूप में तैयार करेंगे और जो फर्नीचर बनाने योग्य नहीं है, उससे खिलौने और सजावट का सामान बनाया जाएगा।
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हिमबुनकर की तरह मिलेगा स्थानीय मिस्त्रियों को काम, चौकीदारी से रोजगार भी
इस लकड़ी से फर्नीचर के अलावा खिलौने और सजावट का सामान बनाने के लिए स्थानीय मिस्त्रियों को हिमबुनकर की तरह काम मिलेगा। इस लकड़ी की चौकीदारी के लिए स्थानीय स्तर पर अस्थायी चौकीदारों की नियुक्ति की जाएगी, तो इससे भी उन्हें रोजगार भी मिलेगा।

 

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