रूसा की खामियों से हजारों स्नातक टीजीटी भर्ती के लिए अपात्र, पढ़ें पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल में जल्दबाजी में लागू किए गए राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) की खामियों की वजह से वर्ष 2013 से 2015 के दौरान स्नातक करने वाले हजारों युवा टीजीटी भर्ती के लिए अपात्र हो गए हैं। रूसा सब्जेक्ट कंबिनेशन का टीजीटी भर्ती एवं पदोन्नति नियमों से मेल नहीं होने से यह समस्या आई है। बीते दिनों घोषित हुए टीजीटी नॉन मेडिकल के परिणाम में हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग ने दो अभ्यर्थियों को पात्र नहीं मानते हुए बाहर कर दिया है।
अब मामला सुलझाने को प्रदेश सरकार ने प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की अगुवाई में कमेटी गठित की है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के टीजीटी के लिए साल 2012 में बनाए गए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार टीजीटी मेडिकल बनने के लिए स्नातक में जूलॉजी, बॉटनी और कैमेस्ट्री विषयों में से एक मेजर और दो को माइनर विषय के तौर पर लेना जरूरी है। नॉन मेडिकल के लिए फिजिक्स, कैमेस्ट्री और गणित में से किसी एक को मेजर व दो को माइनर विषय के रूप में चुनना होता है।
साल 2016 से हुआ सब्जेक्ट कंबिनेशन में बदलाव
वहीं, साल 2013 में लागू किए रूसा सिस्टम के तहत विद्यार्थियों को च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम दिया गया था। इस सिस्टम के चलते विद्यार्थियों ने 2015 तक मेडिकल, नॉन मेडिकल और आर्ट्स के विषयों का कंबिनेशन बनाकर स्नातक कर ली। अब टीजीटी भर्ती में यह विद्यार्थी गलत सब्जेक्ट कंबिनेशन के कारण अपात्र हो गए हैं।
इस मामले को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश विश्वविद्यालय को पत्र जारी कर जल्द इक्वीलेंस कमेटी की बैठक बुलाने को कहा है। निदेशक रोहित जमवाल ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए जल्द ही विवि प्रशासन के साथ बैठक की जाएगी।
साल 2016 में प्रदेश विश्वविद्यालय ने पूर्व निर्धारित सब्जेक्ट कंबिनेशन बदल दिए हैं। यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत प्रावधान किया गया है कि मेडिकल, नॉन मेडिकल और आर्ट्स लेने वाले विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़े सब्जेक्ट पढ़ना जरूरी होंगे।