पौने दो घंटे तड़पता रहा घायल युवक, पीईई किट पहने एंबुलेंस स्टाफ ने नहीं लगाया हाथ
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हिमाचल के बिलासपुर जिले के स्वारघाट स्थित क्वारंटीन केंद्र के बाथरूम में गिरने से युवक की मौत के मामले में पुलिस ने मृतक की बहन की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। पुलिस ने मृतक युवक के इलाज में लापरवाही के आरोप पर स्वास्थ्य विभाग के 108 एंबुलेंस सेवा पर तैनात कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि मौके पर 108 एंबुलेंस पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने पीपीई किट पहनी थी बावजूद इसके घायल युवक हंसराज को तुरंत एंबुलेंस में शिफ्ट नहीं किया। करीब पौने दो घंटे का समय मौके पर उक्त कर्मियों द्वारा जाया किया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि 108 स्वास्थ्य कर्मियों की ओर से हंसराज को नहीं उठाए जाने के बाद स्वारघाट थाने में तैनात एसएचओ समेत कुछ और पुलिस कर्मियों ने मौके पर जाकर घायल को एंबुलेंस में डाला। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन आईजीएमसी ले जाते हुए युवक की मौत हो गई। एसपी दिवाकर शर्मा ने बताया कि अगर स्वास्थ्य कर्मियों ने समय पर अपना काम किया होता और युवक को अस्पताल पहुंचाया होता तो शायद वह बच सकता था। उन्होंने बताया कि मृतक की बहन की शिकायत पर पुलिस ने एंबुलेंस के फार्मासिस्ट और चालक के खिलाफ धारा 304 ए, 341 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। दिवाकर शर्मा ने बताया कि जल्द ही आरोपों के दायरे में आ रहे तमाम कर्मचारियों को पुलिस पूछताछ के लिए थाने में तलब करेगी।
युवक को अस्पताल पहुंचाने वाले पुलिस कर्मियों को दिया नकद इनाम, प्रशस्ति पत्र
स्वारघाट थाने में तैनात एसएचओ और उनकी टीम को प्रशस्ति पत्र जारी किए गए हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के इस दौर में घायल हंसराज को मौके पर उठाने में संभावित खतरे की भी परवाह नहीं की।
तब तक हंसराज का कोरोना टेस्ट भी नहीं हुआ था। ऐसे में बिना पीपीई किट के उसे मौके से उठाकर एंबुलेंस में डाले जाने के इस साहसिक कार्य के लिए इन पुलिस कर्मियों को 1000 रुपये नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र भी जारी किए हैं।
स्वारघाट के युवकों की मौत मामले की हो जांच : चौहान
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की राज्य कमेटी ने बिलासपुर के स्वारघाट क्वारंटीन केंद्र में मध्य प्रदेश से बिलासपुर आए 26 वर्षीय युवक की मौत पर शोक व्यक्त जताते हुए मामले की जांच करने की मांग की है। पार्टी के राज्य सचिव मंडल सदस्य संजय चौहान ने कहा कि इस युवक की क्वारंटीन केंद्र में तबीयत खराब होने के बाद समय पर उपचार के लिए न ले जाने और बिलासपुर में उचित इलाज के बिना आईजीएमसी भेजने की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संजय चौहान ने कहा कि यह जांच का विषय है कि क्या युवक को क्वारंटीन करने से पहले इसका कोविड 19 का टेस्ट नहीं किया गया था। क्या यह युवक पहले से ही बीमार था या नहीं।
यदि था तो क्या उसका मेडिकल चेकअप क्वारंटिन केंद्र में पहले नही किया गया था। उसे उपचार के लिये किसी अस्पताल में क्यों नहीं ले जाया गया। उन्होंने कहा कि इससे सरकार द्वारा बनाए गए केंद्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य व अन्य सेवाओं की दशा भी उचित व व्यवस्थित न होने की पुष्टि होती है। दूसरा जांच का पहलू है कि यदि यह अपने कमरे में गिरा तो जो लोग क्वारंटिन केंद्र में तैनात थे, उन्होंने समय रहते इस युवक को अस्पताल ले जाकर इसका उपचार क्यों नहीं करवाया। तीसरा जांच का विषय है कि क्या बिलासपुर में इतनी भी स्वास्थ्य सुविधा नहीं है कि वह इसका उपचार कर सकते। जब इस युवक को आईजीएमसी में पहुंचाया गया तो उसके साथ इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार क्यों किया गया। इसके शव को क्यों इस दशा में घंटों पड़े रहने दिया।