शिमला: कानून दरकिनार कर रिज पर धरना देने बैठ गए भाजपाई, जानें पूरा मामला
भाजपा ने ऐतिहासिक रिज मैदान पर सरकार और जिला प्रशासन की अनुमति लिए बिना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने मौन धरना दिया। इस दौरान कोरोना नियमों का पालन भी नहीं किया गया। जिला प्रशासन और पुलिस ने न तो धरना-प्रदर्शन करने वालों को रोका और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा से खिलवाड़ के नाम पर कांग्रेस की पंजाब सरकार को घेरने के लिए प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा ने खुद ही एतिहासिक रिज मैदान पर कानून से खिलवाड़ कर दिया। भाजपा ने ऐतिहासिक रिज मैदान पर सरकार और जिला प्रशासन की अनुमति लिए बिना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने मौन धरना दिया। इस दौरान कोरोना नियमों का पालन भी नहीं किया गया। जिला प्रशासन और पुलिस ने न तो धरना-प्रदर्शन करने वालों को रोका और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की। कांग्रेस और पंजाब सरकार के खिलाफ मौन धरने पर बैठने से पहले भाजपा प्रदेश महामंत्री त्रिलोक कपूर ने कहा कि हमारे देश ने एक अभूतपूर्व स्थिति देखी है जहां पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चौंकाने वाली चूक हुई है। देश ने न तो आतंकवाद के सबसे बुरे दिनों में और न ही आतंक प्रभावित क्षेत्रों में ऐसी स्थिति का सामना किया है। यह दिन भारत के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद किया जाएगा। कांग्रेस के खूनी मंसूबे पंजाब की पवित्र भूमि में विफल हो गए।
उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में कभी भी किसी राज्य पुलिस बल को प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को पटरी से उतारने का निर्देश नहीं दिए थे और न ही किसी राज्य सरकार ने देश के प्रधानमंत्री को चोट पहुंचाने की साजिश रची थी। कपूर ने कहा कि इससे भी अधिक चौंकाने वाली और निंदनीय यह है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में घोर चूक पर खुश व्यक्त की है। भाजपा ने पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग करती है। प्रदर्शन में विधायक बलबीर वर्मा, महापौर सत्या कौंडल, चेयरमैन गणेश दत्त, प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय सूद समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे।
कानून का उल्लंघन होने पर अफसरशाही मौन
भाजपा ने शुक्रवार को जिस रिज मैदान पर धरना प्रदर्शन किया वहां पर किसी तरह की सियासी गतिविधि पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। साथ ही गृह विभाग की अनुमति भी जरूरी होती है। लेकिन भाजपा ने न तो आदेशों की परवाह की और न ही अनुमति मिलने का इंतजार किया। भाजपा के सह मीडिया प्रमुख करण नंदा ने कहा कि पार्टी ने जिला प्रशासन के पास अनुमति के लिए आवेदन किया था। हालांकि वह इसका जवाब नहीं दे सके कि उन्हें अनुमति मिली या नहीं। डीसी आदित्य नेगी और एसपी डॉ. मोनिका ने कोई जवाब नहीं दिया। प्रमुख सचिव गृह भरत खेड़ा ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी आयोजन की जानकारी नहीं है।