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अध्ययन में खुलासा: ऊंचे क्षेत्रों में मैदानों से ज्यादा पाई जा रही आंखों के शुष्क होने की बीमारी

Mon, 05 Aug 2024 12:08 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 05 Aug 2024 12:08 PM IST
सार

प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मैदानों से ज्यादा शुष्क आंख की समस्या पाई जा रही है। ऊंचाई पर यह जोखिम आंखों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकता है। 

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Study reveals: Dry eye disease is more prevalent in high altitude areas than in plains
आंखों के शुष्क होने की बीमारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मैदानों से ज्यादा शुष्क आंख की समस्या पाई जा रही है। ऊंचाई पर यह जोखिम आंखों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकता है। यह अध्ययन मिलिट्री अस्पताल शिमला के ओप्थोप्मोलॉजी विभाग की डॉ. विभूति, इसी अस्पताल के सर्जरी विभाग के डॉ. सनत कुमार खन्ना, कमांड अस्पताल चंडीगढ़ की डॉ. रिचा चौधरी और इसी अस्पताल के रेडियो डायग्नोसिज विभाग के डॉ. सौरभ माहेश्वरी ने संयुक्त रूप से किया है। इस अध्ययन को बेऑगलू आई जर्नल में छापा गया है।

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यह अध्ययन ऐसे मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो 2,000–3,000 मीटर की दूरी के बीच आते हैं। यह अध्ययन 250 लोगों पर किया गया। यानी 500 आंखों का गहन निरीक्षण किया गया।  यह अध्ययन 18 से 45 वर्ष उम्र के लोगों पर किया गया। इनमें से भी ज्यादातर 22 से 27 वर्ष के युवा थे। 12 से 26 महीनों तक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रह रहे लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया। पर पहले अच्छी तरह से शोध नहीं किया गया है।
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शोधकर्ताओं ने मध्यम ऊंचाई पर रहने वाले लोगों की आंखों के स्वास्थ्य की तुलना मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों से की। उन्होंने उच्च ऊंचाई वाले समूह में शुष्क आंख में सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण वृद्धि पाई। दृश्य तीक्ष्णता, अंतर्कोशिकीय दबाव या केंद्रीय कॉर्नियल मोटाई में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं देखा गया। उच्च ऊंचाई वाले समूह में केंद्रीय सीरस रेटिनोपैथी के चार मामले और केंद्रीय रेटिनल शिरा अवरोध का एक मामला पाया गया, लेकिन ऊंचाई से संबंध की पुष्टि करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है।
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शोधकर्ताओं ने मध्यम ऊंचाई पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए एहतियात के तौर पर लुब्रिकेंट आई ड्रॉप का उपयोग करने की सलाह दी। इन निष्कर्षों की पुष्टि करने और आंखों पर मध्यम ऊंचाई के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए आगे के अध्ययनों की जरूरत है। यह अध्ययन आंखों के स्वास्थ्य पर मध्यम ऊंचाई के संभावित प्रभाव के बारे में मूल्यवान जानकारी देता है। इसकी पुष्टि करने और निवारक उपाय विकसित करने के लिए और अधिक शोध की जरूरत है।

अध्ययन में ऊंचाई पर ड्राई आई सिंड्रोम की घटनाओं में वृद्धि पाई 
इस अध्ययन में ऊंचाई पर ड्राई आई सिंड्रोम की घटनाओं में वृद्धि पाई। हालांकि मध्यम ऊंचाई का दृश्य तीक्ष्णता, आईओपी या केंद्रीय कॉर्नियल मोटाई पर कोई महत्वपूर्ण नेत्र संबंधी प्रभाव नहीं था। अपने अध्ययन समूह में सीएसआर के चार मामले और सीआरवीओ का एक मामला भी पाया गया। यह अध्ययन विभिन्न देशों के सशस्त्र बलों को मध्यम ऊंचाई पर तैनात करने के लिए स्वास्थ्य सलाह के लिए एक दिशा-निर्देश के रूप में कार्य कर सकता है। यह पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे पर्यटक अभियानों की योजना बनाने में भी सहायता करेगा। आंखों में कई ब्लॉट हेमरेज यानी हरा तीर, एक्सयूडेट्स यानी पीला तीर, टेढ़ी-मेढ़ी और फैली हुई नसें यानी नीला तीर और ऑप्टिक डिस्क एडिमा यानी सफेद तीर दिखाई गई हैं। केंद्रीय सीरस रेटिनोपैथी (सीएसआर) के चार मामले मिले। यह मरीज 25 से 32 साल के बीच के थे। वे केंद्रीय दृश्य क्षेत्र में दृष्टि के धुंधलेपन और केंद्रीय स्कोटोमा की शिकायतों के साथ आए थे। 

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