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शिमला युग हत्याकांड: चार वजहों से फांसी का फैसला उम्रकैद में पलटा, तेजिंद्र के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं

Wed, 24 Sep 2025 10:20 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला।
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 24 Sep 2025 10:20 AM IST
सार

 शिमला के चर्चित युग हत्याकांड मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सात साल बाद जिला कोर्ट का फैसला पलटा है। कोर्ट ने दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के पीछे चार बड़ी वजहें मानी हैं।

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Shimla Yug murder case: Four reasons why death sentence overturned to life imprisonment; lack of solid evidenc
शिमला युग हत्याकांड मामला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिमला के चर्चित युग हत्याकांड मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सात साल बाद जिला कोर्ट का फैसला पलटा है। कोर्ट ने दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के पीछे चार बड़ी वजहें मानी हैं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि युग को बेरहमी से मारा गया था या उसे पानी के टैंक में जिंदा फेंका गया था। दूसरा कोर्ट ने हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर संदेह जताया। अभियोजन पक्ष के गवाह की गवाही पर भी सवाल थे। साथ ही जेल प्रशासन और मनोचिकित्सा विभाग की ओर से सौंपी रिपोर्ट के अनुसार दोषी चंद्र शर्मा और विक्रांत बक्शी का व्यवहार जेल में सामान्य और संतोषजनक रहा। इन्हें कोर्ट ने आधार बनाया। वहीं तेजिंद्र को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। 

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बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखेंगे: विनोद
उधर, हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद युग का परिवार गम में डूबा हुआ है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखेंगे, एजेंसियों ने भी अपना काम सही नहीं किया है। इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। बता दें कि अदालत ने अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण गवाह फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा की गवाही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनकी फोरेंसिक रिपोर्ट और बयान से यह साबित करना मुश्किल हो रहा है कि युग की मृत्यु पानी के टैंक में डूबने से हुई थी। 

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डॉ. शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में ये कहा
हालांकि, यह साबित हो गया है कि अभियुक्तों ने सबूत नष्ट करने का प्रयास किया था, जो आपराधिक साजिश का इशारा करता है। डॉ. शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि युग की फेमुर हड्डी से निकल गए। अस्थि और पानी के टैंक से लिए नमूने में पाए गए डायमट तुलनीय थे। अभियोजन पक्ष का दावा है कि चंद्र शर्मा ने ही फिरौती के पत्र लिखे थे, जिसे ट्रायल कोर्ट ने हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट के आधार पर स्वीकार किया था। हालांकि, विशेषज्ञ की रिपोर्ट में विरोधाभास पाए गए जिससे कोर्ट ने इस सबूत को अविश्वसनीय माना।

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हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर संदेह
अभियोजन पक्ष का एक और महत्वपूर्ण दावा था कि युग का अपहरण फिरौती के लिए किया था और वह 21 जून 2014 तक जीवित था लेकिन हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर संदेह और फिरौती के पत्रों को अभियुक्तों से न जोड़ पाने के कारण यह मकसद भी साबित नहीं हो पाया। कोर्ट ने पाया कि युग 14 जून 2014 को गायब हुआ था जबकि पहला फिरौती पत्र 27 जून 2014 को मिला था। युग के जीवित रहने के दौरान न तो कोई फिरौती पत्र मिला और न ही कोई धमकी भरी कॉल। इसलिए यह निष्कर्ष निकलना मुश्किल है कि अपहरण का मकसद फिरौती था।

नवबहार में एकांत फ्लैट में युग को छिपाया था
नवबहार के फोरेस्ट रोड पर राम चंद्रा चौक के नजदीक फ्लैट को चंद्र शर्मा ने किराये पर लिया था। सीआईडी को घटना वाले दिन इन तीनों के फोन की लोकेशन नवबहार के उस गुप्त घर की ही मिली थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक इसी स्थान पर अपहरण के बाद युग को छिपाकर रखा गया था। मुश्किल युग को संभालने और उसे छिपाने की थी। यह काम मुश्किल हो गया तो दरिंदों ने 22 जून को उसे मार डाला लेकिन वह फिरौती मांगने की फिराक में लगे रहे।

 

ऐसे खुला हत्या का राज, युग रोते हुए कह रहा, वीडियो में मुझे बचा लो
सीआईडी की टीम युग हत्याकांड मामले की जांच कर रही थी लेकिन इसमें कोई कामयाबी नहीं मिल रही थी। इसी दौरान वर्ष 2015 में शिमला पुलिस ने खलीनी में हुई चोरी के मामले में विक्रांत बख्शी को पकड़ा। हालांकि वह कुछ दिन के बाद जमानत पर रिहा हो गया था लेकिन मामले की जांच के लिए उसका मोबाइल कब्जे में लिया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मोबाइल की जांच की तो उसमें युग का वीडियो मिला। इसमें युग यह कहता हुआ दिखा मुझे बचा लो। इसके बाद सीआईडी ने 20 अगस्त 2016 को विक्रांत को गिरफ्तार किया। इसी दिन चंद्र शर्मा और तेजिंद्र पाल को भी गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी वहां पहुंची जहां युग को अपहरण के दौरान कमरे में रखा गया था। तलाशी के दौरान सीआईडी की एसआईटी के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौजूद रही। घटना वाले दिन वह युग को मोबाइल पर गेम खेलने का लालच देकर गोदाम में ले गए और वहां उसके हाथ पांव और मुंह पर टेप बांध दी। यहां उसे गाड़ी में डाला और नवबहार स्थित किराये के कमरे में ले गए। उसे वहां कोई देख न ले इसलिए बेड बॉक्स के अंदर छिपा देते थे। उसके कपड़े तक उतार दिए थे। मोबाइल पर युग की वीडियो क्लिप भी बनाई यही वीडियो गिफ्तारी का आधार बनी।

कलस्टन में पेयजल टैंक में मिला था युग का कंकाल
युग के अपहरण के दो वर्षों तक परिवार उसके सलामत रहने की उम्मीद पाले हुए था लेकिन 22 अगस्त 2016 को विक्रांत की निशानदेही पर सीआईडी ने शहर के कलस्टन में पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया तो उनकी सारी उम्मीदें टूट गई। इसके बाद डीएनए रिपोर्ट में युग का कंकाल होने की पुष्टि हुई। पिता विनोद गुप्ता ने भावुक होते हुए कहा कि अगर आज बेटा जिंदा होता तो पंद्रह साल का हो जाता। बेटे को इस तरह से खोने के गम से आज भी उनका परिवार उभर नहीं पाया है।

सात थे सैंकड़ों कारोबारी
मासूम युग को इंसाफ दिलाने के लिए शहर के सैकड़ों कारोबारी सड़कों पर उतरे थे। इस दौरान कार्टरोड से लेकर लोअर बाजार तक कारोबारियों ने रैली निकाल कर रोष प्रदर्शन भी किया। युग के पिता विनोद गुप्ता और परिजनों की अगुवाई में कारोबारियों ने राज्य विधानसभा में जाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री और हाईकोर्ट में जाकर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। कारोबारियों ने मासूम युग के हत्यारों को फांसी देने और उनके परिजनों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग भी रखी।

जज ने खड़े होकर सुनाया था फैसला
तोड़ दी थी कलम: पांच सितंबर 2018 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने चार वर्षीय मासूम के हत्यारों को खड़े होकर सजा सुनाई थी। सजा पर फैसला सुनाने के बाद जज वीरेंद्र सिंह ने कलम को तोड़कर पीछे की ओर फेंका और सीधे चैंबर की ओर चले गए थे।

कब क्या हुआ

  • 14 जून 2014 को कारोबारी विनोद गुप्ता के चार साल के बेटे युग का फिरौती के लिए अपहरण हुआ।
  • अपहरण के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन गुत्थी सुलझाने में नाकाम रही
  • पुलिस की नाकामी के बाद मामला सीआईडी को सौंपा गया। सीआईडी जांच में ही पूरे मामले का खुलासा हुआ
  • 20 अगस्त 2016 को अपहरण के दो साल बाद सीआईडी ने आरोपी विक्रांत को गिरफ्तार किया।
  • 22 अगस्त 2016 को विक्रांत की निशानदेही पर सीआईडी ने कलस्टन पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया।
  • इसी दिन चंद्र शर्मा और तेजेंद्र पाल को भी गिरफ्तार किया गया।
  • महीनों तक कंकाल टैंक में ही रहा और संबंधित इलाकों में इसी टैंक से पानी की आपूर्ति भी होती रही
  • 25 अक्तूबर 2016 को सीआईडी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
  • 20 फरवरी 2017 को अपहरण और हत्या के मामले का ट्रायल शुरू हुआ।
  • 27 फरवरी 2018 तक जिला एवं सत्र न्यायालय में ट्रायल चला।
  • 5 सितंबर 2018 को तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई।
  • 11 अगस्त को हाईकोर्ट ने युग हत्या मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
  • 23 सितंबर को हाईकोर्ट ने तीन दोषियों को मृत्यु दंड के जिला अदालत के फैसले को पलटते हुए दो को उम्रकैद में बदलने और एक आरोपी को बरी कर दिया।
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