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रेणुका बांध परियोजना: 24 किलोमीटर लंबा जलाशय बनेगा, 40 फीसदी आबादी को मिलेगा पानी
Mon, 17 Jan 2022 01:11 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 17 Jan 2022 01:11 PM IST
सार
रेणुका जी बांध परियोजना में बनने वाला जलाशय 24 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 498 मिलियन घन मीटर उपयोग योग्य जल एकत्रित होगा। इस राष्ट्रीय परियोजना के 40 मेगावाट क्षमता वाले विद्युत गृह से 200 मिलियन यूनिट ऊर्जा का वार्षिक उत्पादन होगा।
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रेणुका जी बांध परियोजना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रेणुका जी बांध परियोजना विद्युत उत्पादन के साथ पेयजल की भी आपूर्ति करेगी। इस बांध से दिल्ली के लिए पानी की सप्लाई होगी। करीब 40 फीसदी आबादी की पानी की समस्या दूर होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 दिसंबर, 2021 को रेणुका जी बांध परियोजना का पड्डल मैदान मंडी से शिलान्यास किया है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी की सहायक नदी गिरी पर बनाई जाएगी। इसका बांध नदी के तल से 148 मीटर ऊंचा होगा, जो बरसात में बह जाने वाले पानी को रोककर उसका भंडारण करेगा।
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इससे बनने वाला जलाशय 24 किलोमीटर लंबा होगा। इसमें 498 मिलियन घन मीटर उपयोग योग्य जल एकत्रित होगा। इस राष्ट्रीय परियोजना के 40 मेगावाट क्षमता वाले विद्युत गृह से 200 मिलियन यूनिट ऊर्जा का वार्षिक उत्पादन होगा। बांध परियोजना के निर्माण में 13.14 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि गिरी नदी की ऊर्जा क्षमता का दोहन करने के लिए वर्ष 1942 में तत्कालीन पंजाब राज्य की ओर से अन्वेषण कार्य शुरू किया गया था।
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1964 में हिमाचल सरकार ने दो परियोजनाओं पर अन्वेषण को आगे बढ़ाया। इनमें एक परियोजना गिरी जल विद्युत परियोजना 60 मेगावाट का कार्य सत्तर के दशक में शुरू हो गया एवं कालांतर में पूर्ण कर लिया गया। रेणुका जी बांध परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट को वर्ष 2000 में जल संसाधन मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने 1224.64 करोड़ की सहमति दी, लेकिन कुछ कारणों से परियोजना अमल में नहीं लाई जा सकी।
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वर्ष 2015 में फिर इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट को जल संसाधन मंत्रालय की तकनीकी सलाहकार समिति ने 4596.76 करोड़ रुपये के कुल मूल्य के लिए स्वीकार किया, लेकिन यमुना बेसिन के लाभान्वित होने वाले राज्यों में अंतर्राज्यीय समझौता न होने के कारण परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।