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Himachal: सुप्रीम कोर्ट ने पांच बीघा भूमि को नियमित करने की नीति पर यथास्थिति रखने के दिए आदेश

Sat, 20 Sep 2025 09:55 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 20 Sep 2025 09:55 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से पांच बीघा भूमि नियमितीकरण नीति को असांविधानिक करार देते हुए रद्द करने वाले फैसले के खिलाफ अगली सुनवाई तक यथास्थिति को बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

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Relief from the Supreme Court for the time being, status quo order on the policy of regularizing five bighas o
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से पांच बीघा भूमि नियमितीकरण नीति को असांविधानिक करार देते हुए रद्द करने वाले फैसले के खिलाफ अगली सुनवाई तक यथास्थिति को बनाए रखने के आदेश दिए हैं। हिमाचल हाईकोर्ट ने 5 अगस्त को पूनम गुप्ता बनाम हिमाचल मामले में हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम की धारा 163 ए को असांविधानिक करार देते हुए इसे रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई है। यह याचिका सीपीआईएम के सचिव और हिमाचल किसान सभा के पूर्व महासचिव डॉ. ओंकार शाद की ओर से दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध था। याचिकाकर्ता की ओर से बताया  कि 16 सितंबर को एसएलपी (सी) दायर की गई थी।

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सुनवाई के बाद उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमारे हस्तक्षेप आवेदन को एसएलपी के साथ टैग कर दिया है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। यह प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। याचिकाकर्ता ने कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से राज्य सरकार को निर्देश दिए गए थे कि सभी अतिक्रमणों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई शुरू करे। यह धारा भूमि राजस्व प्रशासन से संबंधित कुछ शक्तियों और प्रक्रियाओं, जिसमें म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) और रिकॉर्ड में सुधार शामिल है, से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से तर्क दिया कि प्रदेश उच्च न्यायालय का फैसला प्रशासनिक शून्य पैदा करेगा और इससे किसानों समेत ग्रामीण भू-धारकों के ऊपर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि मामले में दायर हस्तक्षेप आवेदन को मुख्य विशेष अनुमति याचिका के साथ टैग किया जाए।

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कब्जे नियमित करने को 1.65 लाख ने किया था आवेदन
हिमाचल में भूमि नियमितीकरण नीति के लिए 1.65 लाख लोगों ने आवेदन किया था। याचिकाकर्ता पूनम गुप्ता की ओर से नीति की वैधता भूमि को चुनौती दी गई थी। हिमाचल में 5 बीघा भूमि नियमितीकरण वाली नीति 2002 बनाई गई थी। नीति के तहत सरकारी पर अतिक्रमण करने वालों लोगों से तत्कालीन राज्य सरकार ने आवेदन मांगे थे। इसके तहत भूमि को नियमितीकरण करने के लिए 1.65 लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। पूर्व भाजपा सरकार ने भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन कर धारा 163-ए को जोड़ा, जिसके तहत लोगों को 5 से 20 बीघा तक जमीन देने और नियमितीकरण करने का फैसला लिया गया था। अगस्त 2002 में हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने प्रकिया जारी रखने के आदेश दिए थे, जबकि पट्टा देने से मना कर दिया था।

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