हिमाचल में सी-ग्रेड सेब की रिकॉर्ड खरीद, 24 हजार बागवानों को लाभ
अभी तक 31 करोड़ 35 लाख की सरकार की ओर से 9.50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से यह राशि किसानों को दी जाएगी। इस बार बंपर फसल होने के कारण एमआईएस की खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसका एक कारण ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त सेब को बोरियों में एमआईएस के एकत्रीकरण केंद्रों में लाया जाना भी एक कारण रहा है।
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हिमाचल प्रदेश में हिमफेड ने सी ग्रेड सेब की रिकॉर्ड खरीद की है। पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए हिमफेड ने इस बार 33 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद कर ली है। 2020 में 18 हजार मीट्रिक टन और उससे पहले वर्ष 2019 में 29 हजार मीट्रिक टन खरीद की गई थी, जबकि वर्ष 2019 में भी सेब की अच्छी खरीद हुई। इससे पहले कभी भी इतनी खरीद नहीं हुई। सी ग्रेड का ओलों से दागी और अन्य तरह से मंडी में बिकने को असमर्थ सेब साढ़े नौ रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा गया है। हिमफेड के अध्यक्ष गणेश दत्त के अनुसार अब तक हिमफेड ने 33 हजार मीट्रिक टन से अधिक की खरीद कर ली है। अभी 10 दिन का सेब सीजन आगे शेष है। 24 हजार बागवानों को इसका लाभ मिला है।
अभी तक 31 करोड़ 35 लाख की सरकार की ओर से 9.50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से यह राशि किसानों को दी जाएगी। इस बार बंपर फसल होने के कारण एमआईएस की खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसका एक कारण ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त सेब को बोरियों में एमआईएस के एकत्रीकरण केंद्रों में लाया जाना भी एक कारण रहा है। सरकार की ओर से समर्थन मूल्य एक रुपये प्रति किलो बढ़ाकर 9.50 रुपये करना और केंद्रों में लाया जाना भी एक कारण रहा है। सरकार की ओर से समर्थन मूल्य में एक रुपये प्रति किलो की वृद्धि करने के कारण भी बागवानों ने अपना सी ग्रेड का सेब पेटियों की जगह बोरियों में एकत्रीकरण केंद्रों में भेजा है।