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शिमला: तीन आईएएस अफसरों के दबाव में टला पंचायतों को मर्ज करने का प्रस्ताव

Thu, 03 Feb 2022 12:52 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 03 Feb 2022 12:52 PM IST
सार

 हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर फैसला लिया जाना था, लेकिन ऐन मौके पर इन अफसरों ने अपने मकान और जमीन को भी नगर निगम में शामिल करवाने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया। लेकिन इनके मकान और जमीन शहर की परिधि से कई किलोमीटर दूर हैं और वहां से पहले कई पंचायतें इसमें आती हैं।

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Proposal to merge panchayats postponed under pressure from three IAS officers
शिमला शहर(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में मर्ज करने का प्रस्ताव प्रदेश सरकार ने फिलहाल टाल दिया  है। शासन में उच्च पदों पर बैठे तीन वरिष्ठ आईएएस अफसरों के दबाव में सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर फैसला लिया जाना था, लेकिन ऐन मौके पर इन अफसरों ने अपने मकान और जमीन को भी नगर निगम में शामिल करवाने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया। लेकिन इनके मकान और जमीन शहर की परिधि से कई किलोमीटर दूर हैं और वहां से पहले कई पंचायतें इसमें आती हैं।

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लिहाजा अगर इनके मकानों को नगर निगम में शामिल कर पाना संभव नहीं। बावजूद इसके उक्त अधिकारी इन क्षेत्रों को मर्ज करने में अड़े रहे, लिहाजा सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक में इसे टाल दिया। 
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सूत्रों के अनुसार ये तीनों आईएएस अधिकारी अपने अपने इलाकों को नगर निगम में शामिल करवाना चाहते हैं। अभी इनके भवन पंचायती इलाके में बने हुए हैं। शहरी विकास विभाग ने जिन पांच पंचायतों के शहरी इलाके नगर निगम में शामिल करने की अधिसूचना जारी की थी, उस सूची में इन अफसरों के इलाके शामिल नहीं हैं।
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पंचायतों की आपत्तियां और सुझाव लेने के बाद शहरी विकास विभाग ने इसकी फाइल मंजूरी के लिए सरकार को भेजी थी। लेकिन अचानक कुछ अफसर अड़ गए। इनका कहना है कि उनके इलाके भी नगर निगम में शामिल किए जाएं। सरकार असमंजस में है कि कैसे इस मामले को सुलझाया जाए। यदि इनके इलाके शामिल करने हैं तो इसके लिए दोबारा संशोधित अधिसूचना जारी करनी होगी और लोगों के सुझाव और आपत्तियां लेने होंगे। इसमें काफी वक्त निकल जाएगा। नगर निगम के चुनाव मई-जून में प्रस्तावित हैं। ऐसे में नगर निगम क्षेत्र के पुनर्सीमांकन का फैसला जनवरी के अंत तक लिया जाना था। लेकिन अब लटकता नजर आ रहा है। फरवरी में आरक्षण रोस्टर पर फैसला होना है, लेकिन इससे पहले सरकार पंचायती इलाके मर्ज करने पर ही फैसला नहीं ले पाई है।

कोठी से लेकर सरघीण तक को शामिल करने के पक्ष में
सूत्रों के अनुसार तीनों अफसरों में एक का रिहायशी भवन मशोबरा भेखल्टी सड़क पर कोठी इलाके में बना है। दूसरे अफसर का एपीजी यूनिवर्सिटी के समीप भवन और तीसरे की सरघीण क्षेत्र में जमीन  है। फिलहाल यह तीनों ग्रामीण इलाकों में शामिल हैं। इन्हें नगर निगम में शामिल करना आसान नहीं है। पंचायतें पहले ही इस पर विरोध जता चुकी हैं। इन्हें शामिल करना इसलिए भी संभव नहीं लगता क्योंकि नगर निगम और इन इलाकों के बीच व नभूमि के अलावा काफी बड़ा पंचायती क्षेत्र है। यदि इन्हें नगर निगम में शामिल करना है तो ये सारे क्षेत्र भी जनता के विरोध के बीच शामिल करने पड़ेंगे, जो आसान नहीं लगते।

इन पांच पंचायतों के क्षेत्र किए जा रहे मर्ज
शहर से सटी पंचायतें भौंट, पगोग, ढली, चम्याणा, मशोबरा पंचायत के इलाके नगर निगम में शामिल करने की तैयारी है। शहरी विकास विभाग इसकी अधिसूचना भी जारी कर चुका है।

दो-तीन दिन में लेंगे फैसला: देवेश
शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में मर्ज करने के प्रस्ताव पर दो-तीन दिन के भीतर फैसला लिया जाएगा। इस पर सरकार के स्तर पर विचार चल रहा है। नए इलाके मर्ज करने की जानकारी नहीं है। जिन इलाकों पर आपत्तियां और सुझाव लिए गए हैं, उनको मर्ज करने पर फैसला होना है। -देवेश कुमार, सचिव शहरी विकास विभाग


क्या कहते हैं शहरी विकास मंत्री  
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि अब नगर निगम की परिधि में नए क्षेत्र शामिल नहीं होंगे। पहले जिन इलाकों को मर्ज करने का फैसला लिया जा रहा है, उसे निरस्त कर दिया गया है। 

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