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सेब के बगीचों में समय से पहले पतझड़ का खतरा, बागवानों की बढ़ी चिंता

Wed, 26 May 2021 10:42 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, रोहडू़
अमर उजाला नेटवर्क, रोहडू़ Published by: Krishan Singh Updated Wed, 26 May 2021 10:42 AM IST
सार

कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ ने माना की रोग फैलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगर समय पर रोकथाम नहीं की गई तो बगीचे रोग की चपेट में आ जाएंगे।

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Premature autumn risk in apple orchards, increased concern of horticulturist
सेब के बगीचों में सेंजोस स्केल कीट का हमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सेब के बगीचों में आल्टर्नेरिया माली और मार्सोनिना कोरोनिया रोग ने दस्तक  दे दी है। इससे समय से पूर्व पतझड़ का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने इससे बचाव के लिए आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की सलाह दी है। बागवानों के मुताबिक छाया और अधिक नमी वाले बगीचों में आल्टर्नेरिया के अधिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं। शुरुआत में रोग सेब की पत्तियों पर दिखाई दे रहा है। पत्तियों की ऊपरी सतह पर गोलाकार गहरे हरे रंग के धब्बे नजर आते हैं।

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ये हरे धब्बे पहले भूरे और फिर गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं। पत्तियों का शेष भाग पीले रंग का होता जाता है। संक्रमित फलों पर भी भूरे रंग के धब्बे होते हैं। इससे फलों का विकास भी रुक जाता है। अधिक वर्षा, नमी और तापमान में गिरावट के कारण यह रोग फैलता है। कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ ने माना की रोग फैलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगर समय पर रोकथाम नहीं की गई तो बगीचे रोग की चपेट में आ जाएंगे। यह रोग सेब के लिए बहुत घातक है। सेब तुड़ान से पहले ही सेब के पौधे से पत्तियां झड़ जाएंगी और फल भी पूरी तरह से खराब हो जाएगा। 
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बचाव के लिए क्या करें बागवान
बागवानी विशेषज्ञ की राय लेने के बाद 500 ग्राम मैनकोजेब और 100 ग्राम कारबेंडाजिम को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। 

सेब के बगीचों में सेंजोस स्केल कीट का हमला
 उधर,  जिला कुल्लू में सेब के बगीचों को सेंजोस स्केल नामक रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है। कीट के प्रकोप से सेब के पेड़ों पर भूरे रंग का धब्बा आने से पेड़ सूखने लगे हैं। पहले से ही सेब पर पड़ी मौसम की मार से बागवान चिंतित हैं। सीजन से ठीक पहले अब सेंजोस स्केल ने बागवानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।  बागवान चित्र सिंह, प्रेम सिंह, लुदर चंद, उदय शर्मा, कमल किशोर, जीवन लाल ने कहा कि तीर्थन घाटी के कई बगीचों में इस बीमारी का अधिक असर देखा जा रहा है।
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सेंजोस स्केल से सेब की गुणवत्ता कम हो जाती है। उचित दाम भी नहीं मिल पाते। जिन पेड़ों पर सेंजोस स्केल कीट के हमले का अधिक असर है। उन पेड़ों के सूखने का डर सताने लगा है। कोरोना के बीच बागवान भी परेशान हैं कि लगातार बगीचों में बढ़ रही बीमारियों को काबू में करने के लिए क्या किया जाए।  बागवानी विभाग के सहायक उद्यान विकास अधिकारी ज्ञान चंद वर्मा ने कहा कि बागवानों के लिए स्प्रे का शेडयूल तैयार किया गया है। इसके अनुसार बागवानों को अपने बगीचों में दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए। 


यह छिड़काव करें बागवान
एचएमओ चार लीटर प्रति 200 लीटर पानी का घोल बनाकर टाइटक्लस्टर अवस्था से पहले छिड़काव करना चाहिए। नवजात रेंगते हुए स्केल को नष्ट करने के लिए मई में क्लोरपैरिफॉस 20 ईसी 400 मिली लीटर प्रति 200 लीटर पानी का घोल का बनाकर छिड़काव करें। 

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