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संकट में हिमाचल की सेब बागवानी: जॉर्डन और अन्य देशों से रुकी पोटाश की आपूर्ति

Sun, 13 Feb 2022 01:30 PM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, शिमला
सुरेश शांडिल्य, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 13 Feb 2022 01:30 PM IST
सार

केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय के उपक्रम इंडियन पोटाश लिमिटेड ने जॉर्डन, इजराइल, कनाडा, रूस आदि देशों से यह खाद पर्याप्त मात्रा में नहीं मंगवाई है। इससे हिमाचल प्रदेश के लिए इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

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Potash supply stopped from Jordan and other countries, Himachal's apple horticulture in trouble
म्यूरेट ऑफ पोटाश(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विदेश से म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद की आपूर्ति रुक गई है। इससे हिमाचल प्रदेश की सेब बागवानी पर बड़ी मार पड़ी है। केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय के उपक्रम इंडियन पोटाश लिमिटेड ने जॉर्डन, इजराइल, कनाडा, रूस आदि देशों से यह खाद पर्याप्त मात्रा में नहीं मंगवाई है। इससे हिमाचल प्रदेश के लिए इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कुछ महीने पहले इस खाद के 50 किलो के रेट 1050 से 1700 रुपये बढ़ाए गए। अब आपूर्ति ही रुकी पड़ी है। बगैर पोटाश खाद के इस बार सेब कैसे उगेंगे, इसको लेकर प्रदेश के सेब बागवान चिंता में हैं। राज्य में हिमफेड के डिपो खाली हो गए हैं। ज्यादातर डिपो में यह खाद ढूंढे नहीं मिल रही है। इसे फरवरी के शुरू से ही सेब बगीचों में डालना शुरू किया जाता है। इस महीने का दूसरा पखवाड़ा बीतने पर भी इसके  न मिलने से सेब बागवानी पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 

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गुलाबी कली, फूलों और फलों का विकास होता है इस उर्वरक से 
सेब की फसल में पोटाश खाद गुलाबी कली, फूलों और फलों के विकास के लिए जरूरी होती है। इस खाद से सेब के फलों में अच्छा रंग आता है। प्रदेश में अगर सेब बागवानी का 5000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार है तो इसमें पोटाश खाद की भी बड़ी भूमिका है। 
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प्राकृतिक तरीके से जॉर्डन और इजराइल के डेड सी में होता है खनन 
इस खाद का प्राकृतिक तरीके से जॉर्डन और इजराइल के बीच स्थित डेड सी में खनन होता है। कुछ अन्य देशों में भी इसकी खानें हैं। यह खाद बनाई नहीं जा सकती है, बल्कि इसे प्राकृतिक  तरीके से खोदकर निकाला जाता है। इंडियन पोटाश लिमिटेड आयात करने के बाद इसकी केवल पैकिंग कर आगे बेचता है। इसके वैश्विक स्तर पर दाम बढ़े हैं। इसी की मार राज्य की सेब बागवानी पर भी पड़ रही है।  
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जनवरी में मंगवा ली थी खाद, अभी तक नहीं आई, जल्दी आने की उम्मीद : एमडी 
हिमफेड के प्रबंध निदेशक जीसी नेगी ने बताया कि पोटाश खाद को जनवरी में मंगवा लिया गया था, मगर यह अभी तक नहीं आई है। इंडियन पोटाश लिमिटेड से संपर्क किया जा रहा है। उम्मीद है कि इसे जल्दी ही सेब बागवानों को उपलब्ध करवा दिया जाएगा। विदेशों से ही आपूर्ति न होने और इसका रेट बहुत अधिक बढ़ने के कारण पहले इसे खरीदने की सरकार से मंजूरी मांगी गई। यह मंजूरी मिलने के बाद जनवरी अंत में ही ऑर्डर किया गया था।

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