City Development Plan: शिमला के कोर और ग्रीन एरिया में भी निर्माण कर पाएंगे लोग, चार सैटेलाइट टाउन भी बनेंगे
टीसीपी विभाग की ओर से तैयार किए इस प्लान को शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में जारी किया। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि 1979 में अंतरिम डेवलपमेंट प्लान बनाया था। इसके करीब 42 साल बाद अब पहली बार भाजपा सरकार ने शिमला का डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के कोर और ग्रीन एरिया में साल 2017 से निर्माण कार्यों पर लगी पाबंदियां हटने वाली हैं। शहरवासी इन इलाकों में अब निर्माण कार्य कर सकेंगे। रिहायशी भवनों के साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्माण कार्य किया जा सकेगा। नॉन कोर एरिया में लगी ढाई मंजिला भवन निर्माण की शर्त भी हट जाएगी। इसके लिए सरकार ने सिटी डेवलपमेंट प्लान का ड्राफ्ट अधिसूचित कर दिया है। टीसीपी विभाग की ओर से तैयार किए इस प्लान को शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित बचत भवन में जारी किया।
शहरी विकास मंत्री ने कहा कि 1979 में अंतरिम डेवलपमेंट प्लान बनाया था। इसके करीब 42 साल बाद अब पहली बार भाजपा सरकार ने शिमला का डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। इसके तहत शहर में निर्माण कार्य किए जा सकेंगे। कहा कि शहर के कोर और ग्रीन एरिया में अभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के चलते निर्माण कार्यों पर पाबंदियां लगी हैं। डेवलपमेंट प्लान लागू होने के बाद इन क्षेत्रों के लोग अपनी खाली जमीन पर निर्माण कार्य कर सकेंगे। भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत यह जीआईएस आधारित डेवलपमेंट प्लान बनाया है। शहर में अब इसी डेवलपमेंट प्लान के तहत निर्माणकार्य करवाए जाएंगे। शहर के अलावा टीसीपी क्षेत्र कुफरी, शोघी और घणाहट्टी में भी यह प्लान लागू होगा।
प्लान पर मांगें लोगों के सुझाव और आपत्तियां
टीसीपी विभाग की ओर से तैयार किए इस प्लान पर अब शहरवासी सुझाव और आपत्तियां दे सकते हैं। एक माह तक यह प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद टीसीपी विभाग सुझावों और आपत्तियों का अध्ययन करेगा और इसके अनुसार संशोधन किया जाएगा। शहरवासी टीसीपी विभाग, साडा के शोघी, घणाहट्टी, कुफरी कार्यालय, नगर निगम कार्यालय में इस पर अपने सुझाव दर्ज करवा सकते हैं। यहां इस प्लान की कॉपी भी लोगों की जानकारी के लिए रखी जाएगी। टीसीपी की वेबसाइट पर भी यह प्लान अपलोड किया जा रहा है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू होगा प्लान
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि जनता से मिले सुझावों के बाद प्लान में जरूरी संशोधन किया जाएगा। इसके बाद टीसीपी विभाग इसे अंतिम रूप देकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजेगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही शिमला में यह प्लान लागू कर दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि एनजीटी ने अपने आदेशों में डेवलपमेंट प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं, इसके तहत ही यह प्लान बनाया है। प्रदेश हाईकोर्ट में भी इससे जुड़ा एक मामला लंबित है। इसलिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू माना जाएगा। इस पर एनजीटी या कही और की अनुमति जरूरी नहीं है।
किस जोन में क्या मिलेगी राहत
ग्रीन एरिया: राजधानी के ग्रीन क्षेत्र के तौर पर 17 स्थान चिन्हित हैं जहां भी यह प्लान लागू होना है। जाखू, बैनमोर, चौड़ा मैदान समेत हरे भरे जंगल वाले वार्ड इसमें शामिल हैं। इस क्षेत्र में निर्माण की शर्तें सबसे सख्त हैं। यहां पेड़ काटकर भवन निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। इस क्षेत्र में सिर्फ रिहायशी भवन बन पाएंगे। व्यावसायिक निर्माण की छूट नहीं दी गई है। प्लान के अनुसार शहर के ग्रीन क्षेत्र में खाली जमीन पर ही निर्माण की मंजूरी दी जाएगी। लोग एक मंजिल के साथ एटिक का निर्माण कर सकते हैं। एटिक का इस्तेमाल रिहायश के तौर पर करने की अनुमति मिलेगी। ग्रीन क्षेत्र के लिए मंजिलें कम रखी हैं, लेकिन फ्लोर एरिया का अनुपात 1.75 की बजाय एक रखा है।
कोर एरिया : शहर के कोर एरिया में सर्कुलर रोड से ऊपर के क्षेत्र को शामिल किया है। ग्रीन एरिया की तरह कोर एरिया में भी अभी भवन निर्माण पर पाबंदी लगी हुई है। इस क्षेत्र में रिहायश और व्यावसायिक दोनों तरह के भवन निर्माण के लिए दो मंजिल के साथ पार्किंग फ्लोर और एटिक के निर्माण की छूट प्लान में दी जाएगी। इस एटिक का दोनों तरह के निर्माण में रिहायश के तौर पर इस्तेमाल हो सकेगा। इस क्षेत्र में बनने वाले रिहायशी भवनों और व्यावसायिक परिसरों की अधिकतम ऊंचाई 13 मीटर रहेगी।
नॉन कोर एरिया: शहर के सर्कुलर रोड से बाहर के क्षेत्र को नॉन कोर एरिया माना गया है। इसमें अब ढाई मंजिला भवन निर्माण की शर्त से राहत मिलेगी। यहां रिहायशी भवनों और व्यावसायिक भवनों के निर्माण के लिए राहत दी है। नॉन कोर एरिया में बनने वाले रिहायशी भवन में अब तीन मंजिलें बना सकेंगे। इसके अलावा पार्किंग फ्लोर अलग बना सकेंगे। पार्किंग के साथ रिहायश के लिए एटिक भी बन सकेगी। रिहायशी भवन की अधिकतम ऊंचाई 16.50 मीटर रहेगी। व्यावसायिक भवनों में चार मंजिलें बनाने की छूट रहेगी। इसके अलावा पार्किंग फ्लोर और एटिक की सुविधा मिलेगी। इनकी अधिकतम ऊंचाई 21 मीटर रहेगी।
जाठियादेवी के पास बसेगा नया शहर, चार सैटेलाइट टाउन भी बनेंगे
सिटी डेवलपमेंट प्लान में शिमला शहर की बढ़ती आबादी को लेकर भी कई प्रावधान किए हैं। इसमें एयरपोर्ट जुब्बड़हट्टी के पास जाठियादेवी में करीब एक लाख की आबादी वाला नया शहर बसाने की योजना है। इस काउंटर मेगनेट टाउन को बसाने का मकसद शहर से बढ़ती आबादी का बोझ कम करना है। इसके अलावा फागू, नालदेहरा, घंडल और चमयाणा में सैटेलाइट टाउन बनाए जाएंगे। इनमें आठ से दस हजार की आबादी को बसाने की योजना है। मुख्य शहर और नए कस्बों में यातायात को लेकर बाईपास रोड तैयार होंगे। शहर में रोपवे आधारित यातायात व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। रोपवे अथारटी इसके लिए शहर में रोपवे का जाल बिछाने के काम पर काम भी कर रही है।
शहर में टनल, पार्किंग, चौक को चौड़ा करने का भी जिक्र किया है। शिमला प्लानिंग क्षेत्र में भारवाहक वाहनों की आवाजाही के लिए अलग सड़कों की व्यवस्था की जाएगी ताकि शहर में इनके आने से यातायात बाधित न हो। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रनिंग ट्रेल, स्काईवॉक को विकसित किया जाएगा। भविष्य में बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर के प्लानिंग एरिया में जमीन का इस्तेमाल 5.51 से बढ़ाकर 12.15 फीसदी तक किया जाएगा। व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र के इस्तेमाल में होने वाले भूमि उपयोग को भी बढ़ाया है। टीसीपी की ओर से तैयार किया गया यह नया डेवलपमेंट प्लान 22450 हेक्टेयर क्षेत्र पर लागू होगा। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि प्लान को अगले 20 साल यानि साल 2041 तक की जरूरतों को देखते हुए तैयार किया है।
नए प्लान में यह मिलेगी राहत
भवन की एटिक की ऊंचाई 2.75 की जगह 3 मीटर होगी
पहली बार एटिक में भी मिलेगी रिहायश की सुविधा
कोर और ग्रीन एरिया में ओल्ड लाइन पर निर्माण की मिलेगी छूट
कोर एरिया में चार साल बाद निर्माण की छूट मिलेगी, दो मंजिल, पार्किंग और एटिक बना सकेंगे
ग्रीन एरिया में चार साल बाद छूट, एक मंजिल और एटिक बना सकेंगे
नगर निगम और टीसीपी क्षेत्र में लागू होंगे नए नियम