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अनदेखी: चुनाव घोषणा पत्रों में ही रह गए पेंशनरों के मुद्दे

Fri, 15 Oct 2021 02:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 15 Oct 2021 02:02 PM IST
सार

पंजाब में 65 साल की आयु पूरा करने पर पांच प्रतिशत, 70 में 10 प्रतिशत और 75 साल में 15 प्रतिशत की बेसिक पेंशन वृद्धि दी जा रही है। हिमाचल सरकार इसे नहीं दे रही है।

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Pensioners issues not solved by bjp and congress led state government in himachal pradesh
आत्मा राम शर्मा, गोविंद चतरांटा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के मुद्दे केवल राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों में ही रह जाते हैं। वर्षों से न भाजपा, न ही कांग्रेस पेंशनरों के मामले सुलझा पाई है। प्रदेश ने पंजाब की तर्ज पर बेसिक पेंशन में वृद्धि नहीं की है। कारपोरेट पेंशनर्स तो अपने पेंशन लाभ की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ रहे हैं।

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हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स कल्याण संघ की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य एवं जिला शिमला के प्रधान आत्मा राम शर्मा ने कहा कि पेंशनरों का सबसे बड़ा मुद्दा बेसिक पेंशन का है। पंजाब में 65 साल की आयु पूरा करने पर पांच प्रतिशत, 70 में 10 प्रतिशत और 75 साल में 15 प्रतिशत की बेसिक पेंशन वृद्धि दी जा रही है। 
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हिमाचल सरकार इसे नहीं दे रही है। सरकार 80 साल के बाद 20 प्रतिशत का लाभ दे रही है, तब तक तो दो प्रतिशत पेंशनर भी नहीं बचते हैं। 65 से 80 साल के बीच तकरीबन एक लाख 50 हजार पेंशनर हैं। यह उपचुनाव में बड़ा मुद्दा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने पेंशनरों की संयुक्त सलाहकार समिति की बैठक एक बार भी नहीं बुलाई है।
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लाखों रुपये के मेडिकल बिल की समय पर अदायगी नहीं हो रही है। वित्त विभाग समय पर बजट नहीं दे रहा है। हिमाचल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस को 11 प्रतिशत डीए देने की अधिसूचना की गई, जिसे विदड्रा किया गया। 

कारपोरेट सेक्टर समन्वय समिति हिमाचल प्रदेश के संयोजक गोविंद चतरांटा ने कहा कि कोई भी सरकार प्रदेश में सत्ता में रही हो, मगर वह पेंशनरों के मुद्दे पर गंभीर नहीं रही है। पुरानी पेंशन, नई पेंशन प्रणाली, भविष्यनिधि पेंशन ये तीन तरीकों से पेंशन मिल रही है। पुरानी पेंशन प्रणाली ब्रिटिशकाल में बन गई थी, जिससे कि बुद्धिजीवी वर्ग बाहर न जाएं।

उस वक्त भी पूंजीपति लोग इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन इस प्रणाली को शुरू किया गया। एनडीए के समय में वर्ष 1998 में भट्टाचार्य कमेटी आई। इस कमेटी ने पेंशन देने की प्रणाली बदलने को कहा, क्योंकि पेंशनरों पर इस खर्च को अनुत्पादक बताया गया। 15 मई 2003 को हिमाचल सरकार ने मामला उठाया कि इस प्रणाली को लागू कर दिया जाएगा।


इसमें संशोधन आया है कि प्रदेश में 15 मई 2003 के बाद जो नई नियुक्तियां प्रदेश के अंदर होंगी, वे इस पेंशन के हकदार नहीं होंगे। इसे नई पेंशन प्रणाली के तहत लाया जाएगा। ये प्रणाली सरकारी कर्मचारियों के लिए है। प्रदेश में कारपोरेट सेक्टर के आठ हजार से ऊपर के पेंशनर इससे वंचित हैं। इस संबंध में पेंशनर अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ते आए हैं। 

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