फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Paragliding in bir billing paragliders accidents near Billing 12 deaths in 19 years

Paragliding: हवा के रुख से अंजान पैराग्लाइडर पायलटों की जा रही जान, 19 सालों में 12 की मौत

Wed, 01 Nov 2023 03:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन चौधरी/राजकुमार सूद, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
विपिन चौधरी/राजकुमार सूद, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 01 Nov 2023 03:29 PM IST
सार

पायलटों के पास भले ही पैराग्लाइडर के सहारे हवा में उड़ने का अनुभव होता है, लेकिन पल-पल बदलती हवाओं का रुख नहीं समझ पाते। इसलिए क्रैश लैंडिंग का शिकार हो जाते हैं।

विज्ञापन
Paragliding in bir billing paragliders accidents near Billing 12 deaths in 19 years
फाइल फोटो - फोटो : संवाद

विस्तार

जिला कांगड़ा की विश्व प्रसिद्ध पैराग्लाइडिंग साइट बीड़ बिलिंग में देश-विदेश से हर वर्ष सैकड़ों पैराग्लाइडर पायलट पहुंचते हैं। यहां हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले होते हैं। लेकिन, आसमान में उड़ान भरने के दौरान पल-पल बदलते हवा के रुख से अंजान होने से कई विदेशी पैराग्लाइडर पायलट हादसे का शिकार हो जाते हैं।

विज्ञापन


वहीं समय पर रेस्क्यू अभियान शुरू न होने और अत्याधुनिक उपकरण न होने से कई पायलट काल का ग्रास बन चुके हैं। यही कारण है कि पिछले आठ दिन से एनडीआरएफ और रेस्क्यू टीमें लापता पोलैंड के पायलट का रेस्क्यू करने में नाकाम रही हैं। भले ही इन पायलटों के पास पैराग्लाइडर के सहारे हवा में उड़ने का अनुभव होता है, लेकिन पल-पल बदलती हवाओं का रुख नहीं समझ पाते। इसलिए क्रैश लैंडिंग का शिकार हो जाते हैं।

विज्ञापन
Trending Videos

विशेषज्ञों की ली जाएगी मदद 

पिछले नौ दिनों से पौलेंड के पायलट कुलाविक को रेस्क्यू नहीं किया जा सका है। हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि उसकी मौत हो चुकी होगी, क्योंकि जहां पर उसका पैराग्लाइडर देखा गया है, वह 700 से 800 मीटर गहरी खाई है। कुलाविक को रेस्क्यू करने के लिए वायुसेना के हेलिकाप्टरों की भी मदद ली गई, लेकिन गहराई होने के कारण वह भी उसे लिफ्ट नहीं कर सके। वहीं अब जिला प्रशासन ने भारतीय सेना से संपर्क कर विशेषज्ञों की मदद मांगी है।  

परिस्थितियों से अनभिज्ञ पायलट 
बीड़ बिलिंग से पैराग्लाइडिंग करते हुए  जितने भी विदेशी पायलट काल का ग्रास बने हैं, उनमें अनुभव की कमी नहीं थी। लेकिन  यहां की परिस्थितियों से अनभिज्ञ हैं। वह ऊंचाई पर तो चले जाते हैं, लेकिन कई स्थानों पर जरूरी थर्मल न मिल पाने के कारण पैराग्लाडर से नियंत्रण खो बैठते हैं। रेस्क्यू टीमों के पास ऐसे अत्याधुनिक उपकरण नहीं हैं, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त पायलट को तुरंत मदद मुहैया करवा सकें। - ज्योति ठाकुर, पायलट, बीड़।

विज्ञापन

जिस स्थान पर पायलट गिरा है, वहां पर आठ दिन से लगातार रेस्क्यू अभियान चलाए गए हैं। वहां पर गहरी खाई है और तापमान शून्य से भी नीचे है। रेस्क्यू टीमों को अभियान चलाने के लिए दो से तीन घंटे ही मिल पा रहे हैं। अब सेना से उनके एक्सपर्ट भेजने को मदद मांगी गई है। - रोहित राठौर, एडीएम, कांगड़ा। 

उड़ान भरने से पहले पायलट से एक बांड भरवाया जाता है। इसमें साफ-साफ लिखा होता है कि वह अपने रिस्क पर उड़ान भर रहा है। इसके अलावा पायलट का बीमा भी होता है। बीमाकृत कंपनी ही दुर्घटनाएं होने के बाद रेस्क्यू अभियान चलाती हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन भी इन अभियान में विशेष मदद करता है। - विनय धीमान, जिला पर्यटन अधिकारी, कांगड़ा।

विज्ञापन

मांगनी पड़ती है सेना की मदद
इसके अलावा रेस्क्यू टीमों के पास अभी तक ऐसे अत्याधुनिक उपकरण नहीं है, जिनसे एमरजेंसी के दौरान तत्काल किसी पायलट का रेस्क्यू किया जा सके। अगर किसी व्यक्ति को रेस्क्यू करने के लिए हेलिकाप्टर या अन्य उपकरणों की जरूरत पड़े तो उसके लिए जिला प्रशासन, वायुसेना या भारतीय सेना से मदद मांगनी पड़ती है। जब तक यह मदद किसी घायल पायलट तक पहुंचती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। 

इतने हुए घायल 
2009 में रूस के डेनिस व फायल हिमानी चामुंडा की पहाड़ियों में फंसकर घायल हुए। 
2018 में ब्रिटिश पायलट मैथ्यू का 12 घंटे के बाद पालमपुर की धौलाधार रेंज में 3650 मीटर की ऊंचाई से रेस्क्यू।

19 सालों में 12 की मौत

2004 में एक पर्यटक की टेंडम फ्लाइंग के दौरान मौत।
2009 में ही रूस का फ्री फ्लायर उड़ान के बाद लापता हुआ था और एक साल के बाद उसका शव भेड़पालकों को मिला।
2012 में अमेरिका के 75 वर्षीय पायलट रोन वाइट की उतराला की पहाड़ियों में मौत।
2016 में धार की पहाड़ी पर 11 केवी एचटी लाइन से टकराने के बाद रूस के पायलट उड़ेन निकोले की मौत।
2018 में ऑस्ट्रेलिया के 50 वर्षीय पायलट संजय कुमार की जोगिंद्रनगर के गांव के समीप क्रैश लैंडिंग से मौत।
2020 में टेंडम फ्लाइंग का प्रशिक्षण लेते छोटा भंगाल के 24 साल के युवक की मौत। 
2021 में ही टेंडम फ्लाइट से गिरकर नगरोटा बगवां के युवक की मौत।
9 मार्च 2022 को उड़ान के दौरान पायलट राकेश निवासी बीड़ की मौत। 
9 मार्च 2022 को  30 वर्षीय पर्यटक आकाश निवासी गाजियाबाद की मौत।
2022 में 9 नवंबर को इंडियन नेवी के अफसर केरला निवासी भवन देव की मौत।
2022 में लखनऊ के पायलट की मौत।
2022 में रूस के पायलट की कंडबाड़ी की पहाड़ियों में क्रैश लैंडिंग के दौरान मौत।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed