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Mandi: तीन दिन बाद उफनती ब्यास नदी से बाहर निकला 16वीं सदी में बना पंचवक्त्र मंदिर

Tue, 11 Jul 2023 09:24 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Tue, 11 Jul 2023 09:24 PM IST
सार

मंदिर के लोगों को दीदार हुए तो उनकी देवी-देवताओं के प्रति आस्था और प्रबल हो गई छोटी काशी के इस 16वीं सदी में बने मंदिर को हालांकि मौजूदा समय में सिल्ट और मलबे से चारों तरफ से घेर लिया है। 

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Panchvaktra temple came out of flooded Beas after three days
पंचवक्त्र मंदिर मंडी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारी बारिश के बाद लगातार ब्यास की तेज जलधारा में समाया हुआ प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर मंगलवार को तीन दिन बाद पानी से बाहर आ गया। मंदिर के लोगों को दीदार हुए तो उनकी देवी-देवताओं के प्रति आस्था और प्रबल हो गई छोटी काशी के इस 16वीं सदी में बने मंदिर को हालांकि मौजूदा समय में सिल्ट और मलबे से चारों तरफ से घेर लिया है। मंगलवार को मंदिर का दरवाजा भी नहीं खुल पा रहा था और अंदर सिर्फ नंदी बैल के सींग ही दिखाई दे रहे थे। मंदिर का अंदर का भाग पूरी तरह से सिल्ट से भर गया है। उधर, इस मंदिर तक पहुंचना भी कठिन हो गया है, मंदिर तक जाने वाला पुल भी ब्यास की तेज धारा में बह गया है।

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इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान शिव की नगरी मंडी में शिव का यह मंदिर लोगों की आस्था से जुड़ा है। स्थानीय निवासी डीएन कपूर, नरेंद्र सैणी आदि ने बताया कि यह मंदिर ब्यास का इतना अधिक तेज बहाव सहने के बाद भी सुरिक्षत है, जो यहां पर भगवान शिव की साक्षात मौजूदगी हो प्रमाणित करता है। बता दें कि भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन पंचवक्त्र मंदिर सुकेती और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित है। पंचवक्त्र महादेव मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसका निर्माण राजा अजबर सेन ने 16वीं सदी के पूर्वार्द्ध में करवाया था। मंदिर एक विशाल मंच पर खड़ा है और बहुत अच्छी तरह से सुसज्जित है। यह भूतनाथ और त्रिलोकीनाथ मंदिरों जैसा बनाया गया है।
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इस तरह से निकाले औट में फंसे हुए पर्यटक
 एनएच कई स्थानों पर बाधित होने के बाद भी पुलिस के जवानों ने हजारों पर्यटकों को सुरक्षित निकाला है। पुलिस ने थलौट की ओर से फोरलेन की पहली टनल में हल्के वाहनों के लिए रास्ता निकाला और उन्हें वाया पंडोह चैलचौक होते हुए निकाला। वहीं, जो वाहन और पर्यटक नगवाईं, झेड़ी, पनारसा आदि स्थानों में फंसे थे, उनको कटौला कमांद होते हुए निकाला गया।

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