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New India Literacy Program: हिमाचल में निरक्षरों को ककहरा सिखाएगी सरकार, सर्वेक्षण शुरू
Fri, 09 Jun 2023 10:19 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 09 Jun 2023 10:19 AM IST
सार
प्रदेश में निरक्षर लोगों को सरकार ककहरा सिखाएगी। राज्य में पूरी तरह निरक्षर लोगों की खोज के लिए केंद्र सरकार के न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के तहत एक सर्वेक्षण शुरू किया गया है।
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निरक्षरों को ककहरा सिखाएगी सरकार(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में निरक्षर लोगों को सरकार ककहरा सिखाएगी। राज्य में पूरी तरह निरक्षर लोगों की खोज के लिए केंद्र सरकार के न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के तहत एक सर्वेक्षण शुरू किया गया है। इस सर्वेक्षण को एक मोबाइल एप के माध्यम से किया जा रहा है। चिह्नित निरक्षरों को पढ़ाने के लिए वालंटियर्स की भी नियुक्ति की जाएगी। एप पर वालंटियर्स भी खुद को पंजीकृत करवा सकेंगे। प्रदेश में यह अभियान 2026-27 तक चलेगा।
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इस प्रोग्राम के पांच घटक मूलभूत साक्षरता और अंक ज्ञान, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल विकास, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा हैं। इसके तहत सर्वेक्षणकर्ता मोबाइल एप पर घर-घर जाकर लाभार्थियों की पहचान कर रहे हैं। अशिक्षित लोग भी मोबाइल एप के माध्यम से किसी भी स्थान से सीधे पंजीकरण कराकर इसका लाभ उठा सकते हैं। यह प्रोग्राम मुख्य रूप से शिक्षण और सीखने के लिए स्वयंसेवा पर आधारित है। इस उद्देश्य के लिए स्वयंसेवक मोबाइल एप के माध्यम से भी पंजीकरण करवा सकते हैं।
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यह प्रोग्राम प्रौद्योगिकी पर आधारित है और मुख्य रूप से ऑनलाइन मोड के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। शिक्षण अधिगम सामग्री और संसाधन एनसीईआरटी के दीक्षा मंच पर उपलब्ध कराए गए हैं और मोबाइल एप के माध्यम से इनका उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य साधनों जैसे टीवी, रेडियो, सामाजिक चेतना केंद्र आदि का भी मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के प्रसार के लिए उपयोग किया जाना है। 15 वर्ष से अधिक आयु के सभी निरक्षर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
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पांच वर्षों के दौरान कार्यान्वयन पर 1037.90 करोड़ रुपये होंगे खर्च
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक पांच वर्षों के दौरान कार्यान्वयन के लिए 1037.90 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ यह नया केंद्र प्रायोजित प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 700.00 करोड़ और राज्यों का 337.90 करोड़ रुपये का है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के करीब पांच करोड़ निरक्षरों को अक्षर ज्ञान कराना है।