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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Literature Festival Shimla: mridula Garg on Discussion on Women's Writing in Indian Languages

Literature Festival Shimla: स्त्री लेखन पर चर्चा से भड़कीं मृदुला गर्ग, बोलीं - इस तरह के न हों सेशन

Sat, 18 Jun 2022 11:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Jun 2022 11:17 PM IST
सार

भारतीय भाषाओं में महिला लेखन पर परिचर्चा में मृदुला गर्ग भड़क गईं। उन्होंने कहा कि अलग से स्त्री लेखन पर गोष्ठी होना ठीक नहीं है। उनका मानना है कि दोबारा से इस तरह के सत्र न हों। लेखक, लेखक होता है। 

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Literature Festival Shimla: mridula Garg on Discussion on Women's Writing in Indian Languages
मृदुला गर्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ के आखिरी दिन शनिवार को ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में भारतीय भाषाओं में महिला लेखन पर परिचर्चा में मृदुला गर्ग भड़क गईं। उन्होंने कहा कि अलग से स्त्री लेखन पर गोष्ठी होना ठीक नहीं है। उनका मानना है कि दोबारा से इस तरह के सत्र न हों। लेखक, लेखक होता है। उसे लेखिका, ट्रांसजेंडर और कवयित्री बोलना ठीक नहीं है। पुरुष हो चाहे महिलाएं। लेखक या कवि शब्दों का प्रयोग होना चाहिए। बोलीं-उन्होंने चीन, जापान और देश में संगोष्ठी की है। उन्हें किसी ने भी इसके लिए नहीं चुना। इस तरह के विमर्शों में मैत्रेयी पुष्पा को बुलाया जाता तो सही होता। उन्होंने कहा कि लेखक अकेला होता है। अकेले में ही सोच-विचार होता है। जो उसके मन विचार आता है, उसे शब्दों में पिरोकर उल्लेख करता है। उन्होंने कहा कि देश में कई भाषाएं हैं। लेखक अलग अलग बोली जाने वाली भाषाओं में साहित्य लिखते हैं। जरूरी नहीं कि उसे सभी लोग पढ़ सकें। ऐसे में रचना का अनुवाद होना चाहिए। इसे हिंदी और अंग्रेजी में भी होना चाहिए, ताकि उसे सब पढ़ सके। यह भी जानकारी प्राप्त हो सके कि लेखक किस पीड़ा को बताना चाहता है।  

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सृष्टि के साथ एकात्म होने का अर्थ ही स्वतंत्रता : चमन गुप्त
 हिमाचल के प्रख्यात हिंदी लेखक अनुवादक और आलोचक चमन लाल गुप्त ने कहा कि सृष्टि के साथ एकात्म होने का अर्थ ही स्वतंत्रता है। सभागार में मौजूद स्कूली छात्रों से कहा कि छात्र पढ़ने में लायक निकलें तो विशाल देवदार के वृक्ष बनेंगे अन्यथा झाड़ी बनकर रह जाएंगे।  हिंदी लेखक अनुवादक और आलोचक चमन लाल गुप्त  ऐतिहासिक गेयटी थिएटर के ललित कला गैलरी में शनिवार को आयोजित उन्मेष अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव में मेरे लिए स्वतंत्रता के मायने विषय पर परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता के मायने भिन्न हैं। हर कोई मुख सूर्य यानी सुख की तरफ रखना चाहता है। हर व्यक्ति स्वतंत्रता चाहता है और अपनी स्वतंत्रता में बाधा कोई नहीं चाहता। उपन्यासकार आरएनजो डीक्रूज ने परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि देश के तटीय क्षेत्रों को सिर्फ मछुआरों के इलाके के रूप में जाना जाता है। जबकि इन क्षेत्रों में भी पहाड़ और वृक्ष होते हैं। मैं तटीय क्षेत्रों के लोगों का प्रतिनिधित्व करने शिमला पहली बार आया हूं और यहां की कठिन परिस्थितियों को लेकर स्तब्ध रह गया।
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तटीय क्षेत्रों के लोग भी बलशाली रहे हैं और देश की स्वतंत्रता में अहम योगदान रहा। ये सिर्फ मछुआरों के इलाके नहीं हैं। लेखक मोहन मोहानी ने कहा कि अस्सी हजार साल पहले भी मानव अपने को जंगली जानवरों के बीच रहकर असुरक्षित महसूस करता है। समाज में रहने के बाद स्वतंत्र रहने लगा। मानव व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ समाज, घर और अपने आसपास के वातावरण में स्वतंत्रता देखने लगा। तेलंगाना के रंगमंच कलाकार संघनाभटला नरसय्या ने कहा- जहां दूसरे की नाक शुरू होती है, यहां दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता खत्म हो जाती है। यूं भी कह सकते हैं कि दूसरे के अधिकार शुरू होते ही हमारी स्वतंत्रता को विराम लगता है। बोलने की स्वतंत्रता, संस्कृति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता का अर्थ बहुत गहरा है। दूसरों की संस्कृति और धर्म का आदर भी जरूरी है। शरण कुमार लिंवाले ने कहा कि कला का आविष्कार स्वतंत्रता है। लोगों के अधिकार से स्वतंत्रता जीवित रहती है। शरण कुमार लिवाले ने कहा कि स्वतंत्रता प्रत्येक का अधिकार है। हम स्वतंत्रता मुफ्त में चाहते हैं।
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