किन्नौर निगुलसरी भूस्खलन: तीन और शव निकाले, 28 पहुंची मृतकों की संख्या
मंगलवार को निकाले गए शवों की पहचान बलराम कुमार पुत्र सुरेश कुमार निवासी दहलान जिला ऊना, सूर्यवंश पुत्र बागजीत निवासी गांव ननसपो पीओ तरंडा तहसील निचार किन्नौर और संतोष कुमारी, पत्नी रमेश चंद गांव सुगरा तहसील निचार के रूप में हुई है।
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किन्नौर जिले के नेशनल हाईवे-5 पर निगुलसरी के पास पहाड़ टूटने के हादसे के सातवें दिन मंगलवार को तीन और लोगों के शवों को निकाल लिया गया है। प्रशासन की ओर से जारी लापता लोगों की सूची के हिसाब से अब सभी शवों को निकाल लिया गया है।
हालांकि, प्रशासन दो दिन और सर्च ऑपरेशन को जारी रखेगा। इस हादसे के मृतकों की संख्या 28 पहुंच गई है। मंगलवार को निकाले गए शवों की पहचान बलराम कुमार पुत्र सुरेश कुमार निवासी दहलान जिला ऊना, सूर्यवंश पुत्र बागजीत निवासी गांव ननसपो पीओ तरंडा तहसील निचार किन्नौर और संतोष कुमारी, पत्नी रमेश चंद गांव सुगरा तहसील निचार के रूप में हुई है।
बचाव दल को तीनों शव घटनास्थल से करीब 150 मीटर नीचे ढांक में मिले। गौरतलब है कि बीते 11 अगस्त को भावानगर से 10 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे -5 पर निगुलसरी के पास यात्रियों से भरी एचआरटीसी बस, टिपर, दो कारों सहित अखबार की गाड़ी पर चट्टानें गिर गई थीं।
एसडीएम मनमोहन ने बताया कि प्रशासन के पास लापता लोगों की जो सूची थी, उसके अनुसार सभी मृतकों के शव मिल चुके हैं। एसपी किन्नौर एसआर राणा ने बताया कि घटनास्थल पर दो दिनों तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।
सबसे कठिन सर्च ऑपरेशन पूरा
सबसे लंबे और कठिन सर्च ऑपरेशन को पूरा कर लिया गया है। सात दिन तक जान जोखिम में डालकर एनडीआरएफ, पुलिस विभाग, आईटीबीपी, सीआईएसएफ एसजेवीएन, गृहरक्षक और अन्य बचाव दलों के 200 से अधिक जवान, स्थानीय लोग बचाव एवं सर्च अभियान में जुटे रहे। घटनास्थल पर पत्थर गिर रहे थे बावजूद इसके बचाव दल डटे रहे।
हादसे के बाद नदी में दो लोग लापता
उधर, शिमला जिला के गुम्मा के समीप बीते रविवार रात सेब से लदी एक जीप दुर्घटनाग्रस्त होकर नदी में समा गई थी। इसमें तीन लोग सवार थे। हादसे के बाद एक व्यक्ति का शव नदी किनारे रेत पर पड़ा मिला था जबकि दो अन्य अभी लापता हैं।
लापता लोगों की तलाश के लिए पिंजौर से आया 12 सदस्यीय दल और चौपाल का प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। बता दें नेरवा के टिक्करी से सेब लेकर सहारनपुर जा रही एक पिकअप गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर टौंस नदी गिर गई थी।