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कुल्लू दशहरा के लिए निकले खुडीजल देवता, मां हिडिंबा नवमी को होंगी रवाना
Tue, 12 Oct 2021 09:13 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 12 Oct 2021 09:13 PM IST
सार
कुल्लू जिले के सबसे अमीर देवता खुडीजल मंगलवार को लाव-लश्कर के साथ दशहरा के लिए रवाना हो गए हैं। इधर, राज परिवार की दादी मां हिंडिबा कल दशहरा के लिए निकलेंगी। 15 अक्तूबर से शुरू हो रहे दशहरा में इस बार नजराना राशि नहीं मिलेगी।
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कुल्लू दशहरा के लिए देवता रवाना।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू दशहरा के लिए दूरदराज के देवी-देवताओं ने कूच करना शुरू कर दिया है। जिले के सबसे अमीर देवता खुडीजल मंगलवार को लाव-लश्कर के साथ दशहरा के लिए रवाना हो गए हैं। इधर, राज परिवार की दादी मां हिंडिबा कल दशहरा के लिए निकलेंगी। 15 अक्तूबर से शुरू हो रहे दशहरा में इस बार नजराना राशि नहीं मिलेगी। इससे इस बार उत्सव में कम देवताओं के आने की उम्मीद है। अधिष्ठाता देव खुडीजल मंडी जिले के खौली और गाड़ागुशैणी होकर कुल्लू रवाना हुए हैं और मंगलवार को देवता का पहला पड़ाव खौली में होगा। कोट पझारी और चोतरू नाग बुधवार सुबह देवालय से निकलेंगे।
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इधर, बंजार और सैंज क्षेत्र के साथ ऊझी घाटी के देवता भी बुधवार को दशहरा के लिए निकलेंगे। सभी देवता 14 अक्तूबर की शाम को ढालपुर में अस्थायी शिविरों में पहुंच जाएंगे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान, कारदार भागे राम राणा और कारदार शेर सिंह ने कहा कि बाह्य सराज के करीब एक दर्जन देवता मेले में हिस्सा लेते हैं। खुडीजल मंगलवार सुबह 11 बजे कुल्लू के लिए निकल गए हैं। ढोल-नगाडों के साथ देवता दशहरा में भाग लेंगे। इधर, दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष और उपायुक्त आशुतोष गर्ग ने कहा कि दशहरा में आने वाले देवी-देवताओं का जिला प्रशासन स्वागत करेगा।
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निरमंड के देवताओं के आने पर संशय
कुल्लू। दशहरा उत्सव में बाह्य सराज निरमंड से भी सात देवरथ शरीक होते हैं। मगर इस बार देवलुओं के लिए कोरोना की दोनों डोज के साथ उत्सव में आने की शर्त और नजराना राशि न देने पर घाटी के देवी- देवताओं के आने पर संशय है। 200 किलोमीटर दूर से आने वाले निरमंड के देवता उत्सव से तीन से चार दिन पहले कुल्लू के लिए प्रस्थान करते हैं।
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मां हिडिंबा के आगमन के साथ शुरू होता है दशहरा
अंतरराष्ट्रीय दशहरा के लिए माता हिडिंबा नवमी के दिन रवाना होंगी। उससे पूर्व मंदिर में तीन दिवसीय हवन-पाठ करने की परंपरा है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मंगलवार से पाठ शुरू किया गया है। छठे, सातवें और आठवें नवरात्र में पाठ की परंपरा निभाई जा रही है। माता के कारादार रघुवीर नेगी ने कहा कि राज परिवार की दादी कही जाने वाली हिडिंबा के मंदिर में हर साल दशहरा से पहले पाठ होता है। पुजारी रोहित राम शर्मा ने कहा कि पाठ में बुधवार को पूर्णाहुति डाली जाएगी। माता के कुल्लू पहुंचने के बाद ही दशहरा उत्सव आरंभ होता है। उधर, कुल्लू राजपरिवार की कुल देवी शवर्णी अपने स्थल शूरू से दशहरा उत्सव के लिए मंगलवार को रवाना हो गई हैं। देवी के पुजारी चुनी लाल शर्मा ने कहा कि देवी-देवता रास्तों में निमंत्रण पर भक्तों के घर भी रुकेंगे।