Organs Donated: हिमाचल के कांगड़ा की ब्रेन डेड बुजुर्ग के अंग दूसरों के जीवन में भरेंगे खुशियां
पीजीआई चंडीगढ़ में बुजुर्ग की दोनों किडनियां दूसरे मरीज को ट्रांसप्लांट कर दी गई हैं, जबकि दो कॉनियां अभी टांडा मेडिकल कॉलेज में ही हैं। दोनो किडनियां टांडा मेडिकल कॉलेज से हवाई जहाज से चंडीगढ़ भेजी गई थीं।
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हिमाचल के कांगड़ा जिले की ब्रेन डेड बुजुर्ग महिला के अंग दूसरे मरीजों के जीवन में खुशियां भरेंगे। पीजीआई चंडीगढ़ में बुजुर्ग की दोनों किडनियां दूसरे मरीज को ट्रांसप्लांट कर दी गई हैं, जबकि दो कॉनियां अभी टांडा मेडिकल कॉलेज में ही हैं। दोनो किडनियां टांडा मेडिकल कॉलेज से हवाई जहाज से चंडीगढ़ भेजी गई थीं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा, कांगड़ा में परिजनों ने 75 साल की ब्रेन डेड बुजुर्ग महिला के अंगदान किए गए। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज टांडा के सर्जरी ट्रांसप्लांट के प्रमुख डॉ. राकेश चौहान और पीजीआई से आए डॉ. दीपेश कंवर व साहिल रेले ने तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में अंग निकालकर प्रत्यारोपण के लिए पीजीआई भेजे हैं। चंडीगढ़ में देर शाम तक मरीजों में अंग प्रत्यारोपण का कार्य जारी रहा। पीजीआई के प्रवक्ता ने बताया कि एक मरीज को बुजुर्ग महिला की किडनियां लगाई गई हैं।
कांगड़ा के पलवाना पंचायत की रहने वाली बुजुर्ग महिला धर्मी देवी दस दिन पूर्व सीढ़ियों से गिर गई थीं। परिजन महिला मरीज को टांडा मेडिकल कॉलेज लाए। चिकित्सकों ने महिला को ब्रेनडेड घोषित किया। महिला के अंग अन्य मरीजों के काम आ सकें, इसके लिए बेटे प्रीतम चंद को स्थिति से अवगत करवाया गया। परिवार के सदस्यों से सहमति के बाद शुक्रवार सुबह 5:00 बजे सर्जरी कर किडनी और कार्नियां को निकाला गया। दो किडनी को मरीजों में प्रत्यारोपण करने के लिए हवाई जहाज से चंडीगढ़ भेजा गया। टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भानु अवस्थी ने बुजुर्ग महिला के परिवार के सदस्यों का अंगदान करने के लिए आभार जताया है।
टांडा से गगल तक बनाया ग्रीन कॉरिडोर, मार्ग करवाया खाली
गुरुवार देर रात क्रॉस मैचिंग के लिए ब्लड सैंपल कांगड़ा बस स्टैंड से बस के माध्यम से पीजीआई भेजे गए। पीजीआई में किडनी फेलियर के दो मरीजों के साथ सैंपल मैच हुए। सैंपल क्रॉस मैचिंग होने के बाद डॉ. राकेश चौहान की अध्यक्षता में टीम ने किडनी और कॉर्निया रिट्रीवल ऑपरेशन शुरू हुआ। यह ऑपरेशन सुबह 8:00 बजे तक चला। इसमें दो किडनी और दो कॉर्निया सफलता पूर्वक निकाले गए। दोनों किडनियों को अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से गगल एयरपोर्ट तक पहुंचाया गया। यहां से सुबह 10:30 बजे फ्लाइट टेक ऑफ हुई। चंडीगढ़ एयरपोर्ट से ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से दोपहर करीब 12:00 बजे किडनी को पीजीआई पहुंचाया गया।
टांडा में पहली बार कोलीडोकल सिस्ट के दो सफल ऑपरेशन
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में पहली बार कोलीडोकल सिस्ट के दो सफल ऑपरेशन किए गए हैं। यह सफल आपरेशन सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार शर्मा और टीम ने किए। मैक्लोडगंज से संबंध रखने वाली 16 वर्षीय लड़की के पेट में छह वर्ष से दर्द रहता था। जांच में पित्त की नाली की विकृति होने का पता चला। युवती को पीजीआई चंडीगढ़ में ले जाया गया था, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। टांडा में जांच के बाद डॉ. राजकुमार शर्मा ने ऑपरेशन करने का जिम्मा उठाया। उन्होंने आपरेशन के दौरान पाया कि पित्त की नाली बार-बार दर्द और सोजिश होने के कारण खून की नसों से चिपकी हुई थी।
इसके चलते ऑपरेशन में बदलाव करते हुए लिल्ली प्रक्रिया से पित्त की नाली को निकाल कर मरीज की छोटी आंत से नई नाली को बनाया गया। चार घंटे चलने वाला यह ऑपरेशन सफल रहा। वहीं दूसरी मरीज नगरोटा बगवां से 29 वर्षीय महिला है। महिला भी पेट में दर्द से परेशान थी। महिला को पित में पत्थरियां होने के साथ-साथ पित्त की नाली में जन्मजात विकृति भी थी। इस महिला का आपरेशन भी डॉ. राजकुमार शर्मा और उनकी टीम ने किया। डॉ. राजकुमार शर्मा की टीम में डॉ. अमित डोगरा, डॉ. हिना, डॉ. राहुल, डॉ. राजकुमार वर्मा, डॉ. ईशान और डॉ. नीतिन शामिल रहे।