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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Jail Bharo Andolan of farmers and apple growers started in Shimla

Jail Bharo Andolan: शिमला में किसानों-बागवानों ने दीं गिरफ्तारियां, मालरोड पर धारा-144 तोड़कर दो घंटे प्रदर्शन

Wed, 17 Aug 2022 07:41 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 17 Aug 2022 07:41 PM IST
सार

बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आए 27 किसान-बागवान संगठनों के जुड़े महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने प्रदर्शन में भाग लिया और गिरफ्तारियां दीं। इस दौरान किसानों-बागवानों और पुलिस के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई।

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Jail Bharo Andolan of farmers and apple growers started in Shimla
किसानों और बागवानों का जेल भरो आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संयुक्त किसान मंच के बैनर तले बुधवार को शिमला में किसानों और बागवानों ने जेल भरो आंदोलन का आगाज कर दिया। शिमला के एतिहासिक मालरोड पर धारा144 तोड़ कर पहली बार लगातार दो घंटे प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर मालरोड से थाने ले जाने के लिए पुलिस के बंदोबस्त कम पड़ गए। बालूगंज थाने के भीतर भी किसानों-बागवानों का प्रदर्शन जारी रहा। बड़ी संख्या में प्रदेश भर से आए 27 किसान-बागवान संगठनों के जुड़े महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने प्रदर्शन में भाग लिया और गिरफ्तारियां दीं। इस दौरान किसानों-बागवानों और पुलिस के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई।

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सरकार की वादाखिलाफी से किसान बागवान खफा है। 20 सूत्रीय मांग पत्र की अनदेखी से नाराज संयुक्त किसान मंच ने सरकार को 1987 और 1990 की तर्ज पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि बड़े कारोबारियों, आढ़तियों और खरीददारों को फायदा देने के लिए सरकार किसानों-बागवानों के हितों की अनदेखी कर रही है। हमारी रोजी-रोटी पर संकट पैदा हो गया है इसलिए अब आरपार की लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। मंडियों में बागवानों का शोषण हो रहा है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मंच ने चेतावनी दी कि किसानों-बागवानों की नाराजगी सरकार को भारी पड़ेगी।
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28 जुलाई की बैठक में मुख्यमंत्री ने संयुक्त किसान मंच की सभी मांगों को जायज करार देते हुए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर मांगें हल करने का आश्वासन दिया था। कमेटी बनी लेकिन किसान बागवानों को सदस्य नहीं बनाया। सरकार भ्रम फैलाने के लिए घोषणाएं कर रही हैं। सरकार ने कार्टन जीएसटी लौटाने का दावा किया लेकिन एक भी किसान को पैसा नहीं मिला, कीटनाशकों पर अनुदान बहाल करने का दावा किया लेकिन किसी को राहत नहीं मिली। एमआईएस की पेमेंट के लिए करोड़ों रुपये जारी करने का दावा किया लेकिन तीन तीन हजार के लिए बागवानों को शिमला बुलाया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है बावजूद इसके सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला नही हो रहा।
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संयुक्त किसान मंच ने नकारी सरकार की कमेटी
निजी कंपनियों के सेब खरीद रेट तय करने के लिए मुख्य सचिव के आदेशों पर कमेटी को संयुक्त किसान मंच ने नकार दिया है। मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि 13 अगस्त को जब अदाणी ने रेट खोले उसके बाद बैक डेट से कमेटी गठित करने के आदेश जारी किए गए। उन्हें और संजय चौहान को कमेटी का सदस्य बनाने की सूचना रात 11 बजे व्हट्सऐप पर दी गई। सरकार कॉरपोरेट घरानों के आगे नतमस्तक हो गई है इसलिए मंच इस कमेटी को नकारता है।
 

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