Sirmour News: पिंगवा गांव में सदियों बाद हुआ दाई भाइयों का ऐतिहासिक मिलन, दिखी पहाड़ी संस्कृति की अनोखी झलक
कमरऊ से पहुंचे अपने भाइयों के स्वागत में उत्तराखंड के दाई भाइयों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। तेज बारिश होने पर भी नाटी-रासे का दौर जारी रहा। बुजुर्ग, युवा, महिला और बच्चे खुशी के इन पलों को अपनी यादों में समेटने के लिए बेताब थे।
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उत्तराखंड में पिंगवा गांव के शांत महायज्ञ में पहाड़ी संस्कृति व दाई भाईयों के मिलन की अनोखी झलक देखने को मिली। मौका था 12 वर्षों बाद होने वाले मां ठाहरी शांत महायज्ञ का। इसमें खून के रिश्ते वाले चार गांवों के दाई भाइयों का सदियों बाद एक साथ मिलन हुआ। इस दौरान हर चेहरे पर खुशी की रौनक थी। कमरऊ से पहुंचे अपने भाइयों के स्वागत में उत्तराखंड के दाई भाइयों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। तेज बारिश होने पर भी नाटी-रासे का दौर जारी रहा। बुजुर्ग, युवा, महिला और बच्चे खुशी के इन पलों को अपनी यादों में समेटने के लिए बेताब थे। उत्तराखंड में पिंगवा गांव के सियाणा इंद्र सिंह तोमर और पंचायत प्रधान पिंगुआ किशन सिंह तोमर ने कहा की ठारी माता शांत पर्व पर सदियों बाद दाई भाइयों (कमरऊ-पिंगुआ) का मिलन हुआ है। 12 वर्ष बाद शांत महायज्ञ धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है।
चार गांवों के दाई भाइयों के मिलन की नई इबारत भी लिखी गई
इस बार चार गांवों के दाई भाइयों के मिलन की नई इबारत भी लिखी गई। ऐसा पहली बार हुआ है जब पिंगवा में सिरमौर के सबसे बड़े व ऐतिहासिक कमरऊ गांव के अलावा जौनसार के कावा खेड़ा, खमरोली और अरनत के बिरादरी भाइयों का पिंगवा से एक साथ मिलन हुआ। जौनसार बाबर के पिंगवा गांव में 12 साल बाद शांत महायज्ञ संपन्न हुआ। इस महायज्ञ में ठारी देवी की परंपरागत पूजा अर्चना के साथ गांव के बिरादरी यानी दाइयों का भी महामिलन हुआ। उत्तराखंड के पिंगवा के ग्रामीण मूलत: हिमाचल प्रदेश के जनपद सिरमौर के ऐतिहासिक गांव कमरऊ से स्थानांतरित हुए हैं। सिरमौर के कमरऊ पंचायत प्रधान मोहन ठाकुर, कुलदीप ठाकुर, दिनेश शर्मा, ज्ञान प्रकाश शर्मा, रमेश ठाकुर, धर्म सिंह, दिनेश ठाकर, प्रेम ठाकुर, विनोद, गुलाब सिंह,मदन ठाकुर व पूरन तोमर ने बताया कि ऐतिहासिक दिन पर उत्तराखंड के पिंगवा के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। कभी सब एक ही परिवार तथा खून का रिश्ता रहा है। सदियों बाद आपस में मिलने हो सका है। शांत महायज्ञ में मिले दाई भाई सब ही गांव शिरगुल महाराज व मां ठारी के उपासक है।
ऐसे चला खून का रिश्ता-दाई भाई होने का पता
ग्राम पंचायत कमरऊ के प्रधान मोहन ठाकुर, दिनेश शर्मा व रमेश ठाकुर ने कहा कि पिछले वर्ष सिरमौर के कमरऊ शालना गांव में श्रीगुल देवता का जागरण था। इसमें हिमाचल और उत्तराखंड से कमरऊ के 15 गांवों के दाई भाइयों को आमंत्रित किया गया था। उसी दौरान पता चला कि उत्तराखंड में एक गांव पिंगवा भी है, जो ऐतिहासिक गांव कमरऊ के लोगों ने बसाया है। इसके बाद इस गांव के लोगों ने कमरऊ के दाई भाइयों को शांत महायज्ञ में आमंत्रित किया था। मां ठारी के गूंजे जयकारे व लिंबर से विधिवत पूजन उतराखंड में देहरादून जिला के ग्राम पिंगवा पहुंचने पर चार गांवों के दाइयों का वेदमंत्रों, फूल मालाओं, पारंपरिक बाध्य यंत्रों की धुनों और बंदूकों की सलामी के साथ भव्य स्वागत हुआ। साथ ही शक्ति स्वरूप माता ठारी देवी के आह्वान के पारंपरिक जयकारे लिम्बरो के साथ विधिवत पूजा की गई। खून का रिश्ता (दाई-भाई) के मिलन पर लोक संस्कृति से जुड़े रासे का भी आयोजन किया गया।