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Kullu News: एनएचएआई, बिजली परियोजना और खनन को ठहराया तबाही का जिम्मेदार, राष्ट्रपति को भेजा पत्र
Mon, 07 Aug 2023 06:42 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 07 Aug 2023 06:42 PM IST
सार
हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु और संयोजक गुमान सिंह ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कहा कि बिजली प्रोजेक्टों के बांधों से बिना किसी सूचना के बड़ी मात्रा में पानी को छोड़ा जाना भी तबाही का कारण है।
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कुल्लू में बारिश से तबाही। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला कुल्लू में आठ से 11 जुलाई तक हुई भारी बारिश और बाढ़ से मची तबाही के जख्म एक माह भी हरे हैं। इसके लिए हिमालय नीति अभियान ने राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का पत्र लिख इस तबाही के लिए एनएचएआई, राज्य सरकार और पनबिजली परियोजनाओं के अवैज्ञानिक निर्माण को जिम्मेदार ठहयाया है। कहा कि एनएचएआई ने किरतपुर से मनाली तक अवैध रूप से जगह-जगह मलबा डंप किया।
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वहीं पहाड़ियों को काटने के साथ-साथ नदियों में इतनी अधिक मात्रा में मलबा निस्तारण डंपिंग साइट के उचित प्रबंधन के बगैर किया जा रहा है। परियोजना निर्माण की गति में तेजी उचित भौगोलिक संज्ञान के बगैर अवैज्ञानिक रूप से लाई जा रही है। हिमालय नीति अभियान के अध्यक्ष कुलभूषण उपमन्यु और संयोजक गुमान सिंह ने राष्ट्रपति काे भेजे गए पत्र में कहा कि सड़क के चौड़ीकरण के दौरान कई हिस्सों में खड़ी पहाड़ी काटने से भूस्खलन में वृद्धि की है।
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इसके अलावा बिजली प्रोजेक्टों के बांधों से बिना किसी सूचना के बड़ी मात्रा में पानी को छोड़ा जाना भी तबाही का कारण है। वहीं विकास के लिए सरकार, कारोबारियों और आम लोगों द्वारा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किए गए हैं। साथ ही ब्यास किनारे में खनन भी नदी के प्रवाह में बदलाव का कारण बना है। इसने भी बाढ़ के प्रभाव को बढ़ाने में योगदान दिया है।
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गुमान सिंह ने कहा कि 1992 में योजना आयोग द्वारा डॉ. एसजे कासिम की अध्यक्षता में गठित विशेष विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट में हिमालय में विकास के लिए दिशा-निर्देश प्रस्तुत किए गए थे। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त 2009 की अवय शुक्ल समिति की सिफारिशों को भी प्रभावी ढंग से कार्यान्वित नहीं किया गया है। इस तरह की घटनाओं के कारणों का आकलन और सत्यापन करने तथा संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक जांच आयोग बनाया जाए।