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हिमाचल: जर्मन विकास बैंक की कार्यकारी समिति ने 50 करोड़ की वार्षिक योजना को दी मंजूरी
Tue, 11 Jul 2023 09:27 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 11 Jul 2023 09:27 PM IST
सार
प्रदेश में जर्मन विकास बैंक की ओर से वित्त पोषित वन इको सिस्टम जलवायु प्रूफिंग परियोजना की कार्यकारी समिति की सातवीं बैठक प्रधान सचिव वन ओंकार शर्मा की अध्यक्षता में हुई।
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प्रधान सचिव वन ओंकार शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में जर्मन विकास बैंक की ओर से वित्त पोषित वन इको सिस्टम जलवायु प्रूफिंग परियोजना की कार्यकारी समिति की सातवीं बैठक प्रधान सचिव वन ओंकार शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए केएफडब्ल्यू परियोजना के 50.20 करोड़ के वार्षिक योजना को स्वीकृत किया गया। मुख्य परियोजना निदेशक उपासना पटियाल ने इसके उद्देश्य और चंबा व कांगड़ा जिलों में चल रही परियोजना की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना 2016 में शुरू की गई थी। शुरुआत में यह 308.45 करोड़ रुपये की परियोजना छह साल के लिए वर्ष 2016 से 2022 तक थी।
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वर्ष 2023 में इस परियोजना को मार्च 2026 तक तीन साल के लिए और बढ़ा दिया गया। यह परियोजना स्थानीय लोगों के सहयोग से लैंटाना व अन्य खरपतवारों के उन्मूलन के साथ-साथ ऐसे क्षेत्रों के पुनर्वास, बांस क्षेत्रों का संवर्धन करने, चील के जंगलों का बहुउद्देशीय पौधों के रोपण से संवर्धन करने, पानी के स्रोतों का कायाकल्प करने और वनों पर आश्रित स्थानीय समुदायों के आय के साधन बढ़ाने के उद्देश्य से आरंभ की गई थी। इसे वर्ष 2016 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा ज़िलों में शुरू किया गया।
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प्रधान सचिव वन ओंकार शर्मा ने कहा कि क्योंकि परियोजना को सूक्ष्म स्तर पर ग्राम वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी से कार्यान्वित किया जा रहा है, इसलिए इस परियोजना के तहत हितधारकों की क्षमता निर्माण बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना के तहत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विशेषकर महिलाओं की एक्सपोजर यात्राएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना के अंतर्गत बंजर वन भूमि के पुनर्वास के लिए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए।
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प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख राजीव कुमार ने कहा कि यह परियोजना धर्मशाला और चंबा क्षेत्रों में 39 वन परिक्षेत्रों और 9 वन मंडलों में कार्यान्वित की जा रही है। परियोजना के लक्ष्यों व कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी व फील्ड स्टाफ को मज़बूत करके प्राप्त किया जाएगा। इस बैठक में विशेष सचिव वन सीपी वर्मा, एपीसीसीएफ वित्त आर लालनुन सांगा, सहायक निदेशक ग्रामीण विकास रॉबिन और वन विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।