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वीरेंद्र चौहान बोले- अंक निर्धारण की प्रक्रिया मेधावियों के हित में नहीं
Sun, 13 Jun 2021 10:31 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 13 Jun 2021 10:31 PM IST
सार
संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बच्चों के भविष्य के लिए होने वाले इतने बड़े निर्णय के लिए कोई भी अभ्यास नहीं किया।
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हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने दसवीं और बारहवीं कक्षा के अंक निर्धारित करने के लिए बनाए फार्मूले पर सवाल उठाते हुए इसे मेधावी विद्यार्थियों के हित में नहीं बताया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से इस मामले पर दोबारा से विचार करने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बच्चों के भविष्य के लिए होने वाले इतने बड़े निर्णय के लिए कोई भी अभ्यास नहीं किया।
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हैरानी की बात है कि बोर्ड ने इतने बड़े निर्णय लेने से पहले पंजीकृत शिक्षक संघों, शिक्षाविद और अभिभावकों से भी मंत्रणा करना उचित नहीं समझा। चौहान ने कहा कि 10वीं और 12वीं के हिंदी और अंग्रेजी का जो पेपर हुआ है उसके लिए क्राइटेरिया लगाना कितना तर्कसंगत है।
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उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि बहुत से बच्चे जिनके अंग्रेजी या हिंदी के पेपर में 85 या 90 नंबर आ रहे हैं और प्री बोर्ड व फर्स्ट, सेकंड टर्म के क्राइटेरिया के आधार पर जिसमें 40 नंबर प्री बोर्ड के रख दिए गए हैं और केवल मात्र पांच नंबर ही वार्षिक पेपर के क्राइटेरिया मे रखे गए है तो इसके आधार पर यदि बच्चे के कुल अंक 80 ही बनते हो तो उस बच्चे को 90 नंबर की जगह जो उसने वार्षिक परीक्षा में वास्तव में अर्जित किए हैं। उसके स्थान पर 80 नंबर देना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ी खामी अध्यक्ष ने शिक्षा बोर्ड को सलाह दी कि क्राइटेरिया में दोनों विकल्प रखे जाएं।
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