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हिमाचल में न तो बिकेंगे चाय बागवान, न ही लैंड यूज बदलेगा, विधानसभा में विधेयक पेश
Wed, 11 Aug 2021 10:58 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 11 Aug 2021 10:58 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में पालमपुर, बैजनाथ और जोगिंद्रनगर में चाय के बागान हैं। बुधवार को राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने सदन में हिमाचल प्रदेश भूजोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2021 सदन में प्रस्तुत किया।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में न तो गैर कृषि और अन्य कार्यों के लिए चाय के बगीचे बिकेंगे और न ही लैंड यूज बदलेगा। अब सरकार की अनुमति से भी ऐसा नहीं हो सकेगा। सरकार अपनी ही शक्तियां खत्म करने जा रही है। राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने इस संबंध में मंगलवार को सदन में एक विधेयक पेश किया। इसे आगामी दिनों में इसी सत्र में पारित किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में पालमपुर, बैजनाथ और जोगिंद्रनगर में चाय के बागान हैं।
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बुधवार को राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने सदन में हिमाचल प्रदेश भूजोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2021 सदन में प्रस्तुत किया। इसमें हिमाचल प्रदेश भूजोत अधिकतम सीमा अधिनियम 1972 की धारा - 6 ए में राज्य सरकार की अनुमति के बिना और 7 ए की उपधारा-एक में राज्य सरकार की अनुमति के सिवाय शब्दों को हटाने का प्रस्ताव रखा गया। धारा 6 ए में प्रदेश सरकार की अनुमति के बगैर जमीन नहीं बेचे जाने और धारा 7 ए में राज्य सरकार की अनुमति के सिवाय लैंड यूज नहीं बदले जाने का प्रावधान है।
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र्हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
1972 में बने इस अधिनियम के अनुसार किसी भी प्रदेश में व्यक्ति के पास 150 बीघा से ज्यादा जमीन नहीं रह सकती है। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1973 में इस अधिनियम के नियम बने। 1986 के फिर बने नियमों में यह प्रावधान है कि सरकार की अनुमति के बगैर चाय के बागान नहीं बेचे जा सकेंगे और न ही इनका लैंड यूज बदलेगा। सरकार के इन नियमों को कुंज बिहारी लाल बुटेल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सरकार के पास ऐसी व्यवस्था का प्रावधान नहीं है और एक्ट में जब यह बात नहीं है तो ऐसे नियम सही नहीं है। इस पर सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट में जब सरकार हारी तो इस एक्ट में वर्ष 2000 में 6 ए और 7 ए धाराएं डाल दी गईं कि सरकार की अनुमति के बगैर चाय के बगीचे न तो बेचे जा सकेंगे और न लैंड यूज बदला जा सकेगा।