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Himachal High Court: तदर्थ सेवा अवधि को सभी सेवा लाभ के लिए गिना जाए
Sun, 01 Jan 2023 01:18 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 01 Jan 2023 01:18 PM IST
सार
अदालत ने शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ताओं को छह हफ्ते के भीतर तदर्थ सेवा का लाभ बंचिंग इंक्रीमेंट के लिए दे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तदर्थ सेवा से जुड़े मामले में अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने तदर्थ सेवा की अवधि को सभी सेवा लाभ के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने मदन लाल और अन्य की ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि तदर्थ सेवा अवधि को सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एसीपी) के लिए नहीं गिना जा सकता।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि तदर्थ सेवा को वरीयता के लिए भी नहीं गिना जा सकता है। मामले के अनुसार 10 वर्ष की तदर्थ सेवा के बाद याचिकाकर्ताओं को जेबीटी के पद पर नियमित किया गया था। हाईकोर्ट की ओर से परस राम के मामले में पारित निर्णय के अनुसार उनकी तदर्थ सेवा को इंक्रीमेंट के लिए गिया गया। यही नहीं, इस तदर्थ सेवा को पेंशन के लिए भी गिना गया, लेकिन विभाग ने इस सेवा को बंचिंग इंक्रीमेंट (इक्कट्ठा लाभ) के लिए नहीं गिना गया। 24 दिसंबर 2010 को राज्य सरकार ने निर्णय लिया था कि तदर्थ सेवा को बंचिंग इंक्रीमेंट के लिए नहीं गिना जाएगा।
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सरकार के इस निर्णय को अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि जब तदर्थ सेवा अवधि को पेंशन और इंक्रीमेंट के लिए गिना जा सकता है तो इसका लाभ बंचिंग इंक्रीमेंट के लिए क्यों नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की ओर से सेवा अवधि के दौरान अर्जित की गई इंक्रीमेंट को वेतन निर्धारण के समय गिना जाना चाहिए। अदालत ने शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि वह याचिकाकर्ताओं को छह हफ्ते के भीतर तदर्थ सेवा का लाभ बंचिंग इंक्रीमेंट के लिए दे।
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