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बाबूगिरी ने जाम कर दी परीक्षाओं में जैमर लगाने की योजना
Mon, 19 Oct 2020 11:19 AM IST
अरविन्द ठाकुर
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 19 Oct 2020 11:19 AM IST
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हिमाचल प्रदेश में बाबूगिरी ने परीक्षाओं में लगने वाले जैमर की योजना को ही जाम करके रख दिया। जयराम सरकार में ही जब सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा के दौरान हाईटेक उपकरणों की मदद से नकल का भंडाफोड़ हुआ तो सरकार ने परीक्षाओं को फूलप्रूफ बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया था। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि अब सभी बड़ी परीक्षाओं में जैमर का प्रयोग किया जाएगा।
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इस बैठक में पुलिस के अलावा कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर और राज्य लोक सेवा आयोग के अधिकारी भी मौजूद थे। इसी बैठक में यह भी तय हुआ था कि परीक्षा के लिए ली जाने वाली फीस से ही परीक्षा कराने वाली एजेंसी ही वहन करेगी। बैठक में हुए निर्णय के तुरंत बाद हुई सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा में पहली बार जैमर का प्रयोग किया गया।
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चूंकि इस परीक्षा में पुलिस को दोबारा बच्चों से फीस न लेने का फैसला जयराम सरकार ने लिया था। इसलिए सरकार ने दोबारा हुई परीक्षा में जैमर का खर्च खुद वहन किया। इसके बाद माना गया कि अब हर बड़ी परीक्षा में जैमर लगाए जाएंगे। लेकिन बाबूगिरी का हाल यह है कि तब से अब तक राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग ने बिना जैमर के ही परीक्षाएं आयोजित करा रहा है।
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सरकार के फैसले को नजरंदाज करने का नतीजा यह हुआ कि एक बार फिर मोबाइल फोन की मदद से नकल हुई और परीक्षा आयोजित कराने वाले कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर हाथ पर हाथ धरे बैठा रह गया। सरकार अब फिर सवालों के घेरे में है क्योंकि वह अपने ही निर्णय को लागू नहीं करा पाई।