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हिमाचल: जमीन गिरवी रखने के बाद भी किसानों से गारंटी मांग रहे बैंक, जानिए पूरा मामला

Fri, 30 Jan 2026 11:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 30 Jan 2026 11:00 AM IST
सार

केसीसी योजना के तहत किसानों को आसान और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच बैंकिंग स्तर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। 

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Himachal Pradesh: Banks are demanding guarantees from farmers even after they have mortgaged their land
केसीसी ऋण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत किसानों को आसान और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच बैंकिंग स्तर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। नियमों के स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद राज्य में कई बैंक किसान क्रेडिट कार्ड जारी करते समय किसानों से जमीन गिरवी रखने के बाद भी अतिरिक्त गारंटी या जमानतदार की मांग कर रहे हैं। इस पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने कड़ा संज्ञान लिया है। नाबार्ड ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि दो लाख रुपये तक के किसान क्रेडिट कार्ड ऋण पर किसी भी प्रकार की गारंटी नहीं ली जानी चाहिए। यह प्रावधान भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड के दिशा-निर्देशों में पहले से ही शामिल है। इसके बावजूद यदि बैंक शाखाएं किसानों से अतिरिक्त शर्तें थोप रही हैं तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन है। राज्य में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। कई किसानों को या तो अनावश्यक औपचारिकताओं के कारण ऋण से वंचित किया जा रहा है या फिर उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

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ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि बैंक जमीन के दस्तावेज जमा कराने के बावजूद गारंटर लाने या अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखने की शर्त रख रहे हैं। इससे छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जो पहले ही आर्थिक दबाव में हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को समय पर संस्थागत ऋण नहीं मिलेगा तो वे साहूकारों पर निर्भर होने को मजबूर होंगे। नाबार्ड ने संकेत दिए हैं कि इस तरह के मामलों की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषी बैंक शाखाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही जिला और ब्लॉक स्तर पर बैंकों की निगरानी बढ़ाने की भी योजना है।

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दो लाख तक गारंटी नहीं ली जानी चाहिए: संदीप
नाबार्ड के महाप्रबंधक संदीप शर्मा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। दो लाख रुपये तक के किसान क्रेडिट कार्ड पर गारंटी नहीं ली जानी चाहिए। उन्होंने कि ऐसे मामलों पर उपयुक्त कार्रवाई करेंगे। प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 32 फीसदी की ही कवरेज है, जो काफी कम है।

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