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हिमाचल पुलिस संभालेगी अटल टनल की सुरक्षा, उच्च स्तरीय बैठक में फैसला

Fri, 09 Oct 2020 11:07 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 09 Oct 2020 11:07 AM IST
सार

  • अटल टनल की सुरक्षा का पूरा जिम्मा हिमाचल पुलिस संभालेगी
  • उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया फैसला
  • उत्तर व दक्षिण पोर्टल पर स्थायी सुरक्षा तंत्र 
  • टनल का मेंटेनेंस बीआरओ के पास रहेगा

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Himachal Police will handle Atal tunnel rohtang security, decision in high level meeting
अटल टनल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के लिए सामरिक दृष्टि से अति संवेदनशील अटल टनल रोहतांग की सुरक्षा का पूरा जिम्मा हिमाचल प्रदेश पुलिस संभालेगी। गुरुवार को मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में गृह, वन, सेना, बीआरओ, आईबी और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। बैठक में तय हुआ कि पुलिस टनल के अंदर व बाहर उत्तर व दक्षिण पोर्टल पर स्थायी सुरक्षा तंत्र खड़ा करेगी। टनल का मेंटेनेंस बीआरओ के पास रहेगा। टनल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था के लिए बीआरओ और पुलिस के नोडल अधिकारी काम करेंगे। आधुनिक तकनीक वाले निगरानी तंत्र की मदद से ट्रैफिक मैनेज किया जाएगा। कैट प्लान के तहत बीआरओ से मिलने वाले बारह करोड़ से  लाहौल की तरफ पौधरोपण किया जाएगा जबकि टनल निर्माण के दौरान आसपास बनाए गए बीआरओ की रिहाइशों को हिमाचल पुलिस इस्तेमाल करेगी। 

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वाहनों खासकर सेना के रसद और आयुध के अलावा पेट्रोलियम पदार्थों के आवागमन को लेकर स्टैंडर्ड ऑपरेेटिंग प्रोसीजर के तहत ही आने-जाने की अनुमति दी जाएगी। इस दौरान पुलिस इन वाहनों को टनल पार करने के लिए एस्कार्ट करेगी। बैठक में पुलिस के भेजे सुरक्षा प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक अनुमति दे दी है। मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने बताया कि कैबिनेट की आने वाली बैठक में पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी जा सकती है। बैठक में डीजीपी संजय कुंडू के अलावा अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन संजय गुप्ता, सेना, सीमा सड़क संगठन के अलावा कुछ खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल हुए। 

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कई एजेंसियों में तालमेल में आ सकती थी दिक्कत

जम्मू-कश्मीर की जवाहर टनल की तर्ज पर पहले सेना इस टनल की सुरक्षा संभालने पर विचार कर रही थी, लेकिन हिमाचल पुलिस की दलील थी कि चूंकि हिमाचल की यह टनल महज वाहनों के गुजरने के लिए नहीं बनी है। इस टनल के आसपास पहले से ही पर्यटन स्पॉट है और आने वाले समय में यह एक बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता है।

ऐसे में आसपास के क्षेत्र की भी व्यवस्था पुलिस को संभालनी होगी। वाहनों की संख्या भी दो लाख तक जा सकती है। ऐसे में ट्रैफिक व्यवस्था का भी जिम्मा पुलिस को संभालना होगा। इसी वजह से टनल के अंदर व बाहर की भी सुरक्षा उसे दी जाए। केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों ने इस दलील को माना और तय हुआ कि केंद्रीय खुफिया एजेंसियां टनल को लेकर अपनी सूचनाएं पुलिस के साथ साझा करेंगी। 

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