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मंडी में जेई समेत तीन, नाहन में कनिष्ठ सहायक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Fri, 19 Feb 2021 01:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/नाहन (सिरमौर)
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी/नाहन (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 19 Feb 2021 01:24 PM IST
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Himachal News: vigilance file chargesheet against junior engineer and two otjers in Mandi himachal pradesh
जांच-सांकेतिक - फोटो : pixabay

जोगिंद्रनगर के जोल में 2014 में कूहल और सिंचाई योजना के टैंक निर्माण में सरकारी के धन के गबन के मामले में पुलिस ने आरोपी जेई भू-संरक्षण विभाग, अध्यक्ष और महासचिव कृषक विकास संघ के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। शिकायत के बाद विजिलेंस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच की थी।

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कूहल और जल सरंक्षण टैंक के निर्माण के लिए कोटेशन जरूरी थी। जांच में पाया गया कि तीनों ने मिलीभगत कर फर्जी कोटेशन तैयार की। विजिलेंस ने विशेष न्यायाधीश मंडी की अदालत के समक्ष तीनों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है।
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उधर सरकारी सीमेंट बरामदगी मामले में लोनिवि से ठेकेदार का पंजीकरण रद्द करने की सिफारिश विजिलेंस ने की है। विजिलेंस की ओर से दिसंबर 2019 में औचक निरीक्षण के दौरान सुंदरनगर में एक निजी निर्माण स्थल से सरकारी सीमेंट के बैग मिले थे। इसके आधार पर विजिलेंस थाना मंडी में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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जांच में पता चला है कि सरकारी सीमेंट लोनिवि के ठेकेदार को जारी किया था। उसने यह सीमेंट रिश्तेदार को दे दिया। जांच के बाद ठेकेदार और उसके चचेरे भाई के खिलाफ 16 फरवरी 2021 को स्पेशल जज मंडी की अदालत के सामने आरोप पत्र दायर किया गया था। लोनिवि को आरोपी ठेकेदार का पंजीकरण रद्द करने की सिफारिश की गई है।

सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और कर्मियों का पैसा डकारने वाले लोक निर्माण विभाग के एक कनिष्ठ सहायक के खिलाफ विजिलेंस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। कनिष्ठ सहायक राजूराम पर 10 लाख रुपये के गबन के आरोप हैं, उसने कर्मियों का पैसा अपने निजी खाते में ट्रांसफर किया है। मामला 2017 का बताया जा रहा है।

लोक निर्माण विभाग में तैनात कनिष्ठ सहायक के खिलाफ विजिलेंस ने सरकारी रिकॉर्ड से टेंपरिंग और सरकारी राशि का गबन करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। मामले की जांच के दौरान पता चला कि कनिष्ठ सहायक लोक निर्माण विभाग के नाहन कार्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल, टीए बिल, जीपीएफ और कर्मचारियों के नकदीकरण बिल संबंधी क्लर्क का काम देख रहा था।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने टोकन रजिस्टर में हेरफेर किया है। झूठे बिल तैयार किए। यही नहीं छानबीन के दौरान यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने के बजाय आरोपी ने धोखे से अपने ही बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी। कनिष्ठ सहायक ने मॉडस ओपरा के माध्यम से 2016 से 2018 के दौरान लगभग 10 लाख रुपये का घपला किया।


इसे लेकर विजिलेंस ने विशेष न्यायाधीश नाहन की अदालत के समक्ष धोखाधड़ी, गबन, भ्रष्टाचार और अभिलेखों के गलत इस्तेमाल के लिए चार्जशीट दायर की है। मामले की पुष्टि डीएसपी विजिलेंस तरणजीत सिंह ने की है। उन्होंने बताया कि इस मामले में तफ्तीश पूरी करने के बाद विशेष न्यायाधीश नाहन की अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कई खुलासे हुए हैं, जिसमें सरकारी धनराशि के गबन के साथ-साथ सरकारी रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ की गई थी।

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