फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   himachal news: Pea powdery mildew fungal disease now will damage crop

किसानों को राहत: अब पाउड्री मिल्ड्यू से तबाह नहीं होगी मटर की फसल, रोगरोधी बीज तैयार

Wed, 08 Dec 2021 12:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 08 Dec 2021 12:24 PM IST
सार

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. एचके चौधरी और डॉ. अमर सिंह कपूर ने जब पाया कि लाहौल में जब मटर तैयार होता है तो उससे कुछ दिन पहले फसल पर काले धब्बे पड़ने लगते हैं। इतना ही नहीं, इस रोग से मटर की 25 से 40 फीसदी फसल बीमारी की चपेट में आ जाती है। पाउड्री मिल्ड्यू मटर को खराब कर रहा है, परंतु यह कहां से हर साल घुस रहा है। इसका पता लगाना जरूरी था। 

विज्ञापन
himachal news: Pea powdery mildew fungal disease now will damage crop
मटर (फाइल फोटो) - फोटो : Pixabay

विस्तार

प्रदेश के ठंडे इलाकों में मटर की बिजाई करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर की है। अब पाउड्री मिल्ड्यू से उत्पन्न होने वाले फफूंद से उनकी फसल खराब नहीं होगी। कृषि विवि के प्लांट पैथोलॉजी विभाग ने इसके लिए रोगरोधी बीज तैयार किया है।दरअसल लाहौल क्षेत्र को गुणवत्ता वाले मटर की पैदावार के लिए जाना जाता है। यहां से हर साल देश के अन्य राज्यों में करोड़ों रुपये का मटर भेजा जाता है। यहां मटर की फसल पाउड्री मिल्ड्यू तबाह कर रहा है।

विज्ञापन


फसल को चौपट करने वाला फफूंद किसानों के लिए पहेली बना था कि आखिरकार यह कैसे पनप रहा है और हर साल किस कारण से फसल को अपनी चपेट में लेता है। देश के नामी कृषि वैज्ञानिकों ने लाहौल में मटर की फसल पर अध्ययन करने के बाद पाया कि पाउड्री मिल्ड्यू कहां से मटर के खेतों में घुसपैठ करता है और यह मटर की फसल ही क्यों बर्बाद करता है।
विज्ञापन


कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति डॉ. एचके चौधरी और डॉ. अमर सिंह कपूर ने जब पाया कि लाहौल में जब मटर तैयार होता है तो उससे कुछ दिन पहले फसल पर काले धब्बे पड़ने लगते हैं। इतना ही नहीं, इस रोग से मटर की 25 से 40 फीसदी फसल बीमारी की चपेट में आ जाती है। पाउड्री मिल्ड्यू मटर को खराब कर रहा है, परंतु यह कहां से हर साल घुस रहा है। इसका पता लगाना जरूरी था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. चौधरी कहते हैं कि वैज्ञानिकों की टीम अध्ययन के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पाउड्री मिल्ड्यू फरवरी-मार्च में फिर सक्रिय होता है और मटर की फसल को तबाह करने लगता है। इसके बाद कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने मटर के पाउड्री मिल्ड्यू फफूंद रोधक बीज विकसित करने के साथ दवाओं को विकसित किया। प्लांट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. डीके बन्याल ने कहा कि पाउड्री मिल्ड्यू के फैलने के कारणों का पता चलने के बाद वैज्ञानिकों ने रोग रोधक मटर के बीज विकसित किए। साथ ही मटर को पाउड्री मिल्ड्यू से बचाने के लिए दवाएं भी विकसित कीं। इसके बाद मटर उत्पादकों ने राहत पाई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed