सेब के बाद अब संतरे की खुशबू से महकी कमरूघाटी, पिता और पुत्र ने तैयार किया बगीचा
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महाराष्ट्र के नागपुर की तर्ज पर अब मंडी जिले की बर्फीली कमरूघाटी में भी संतरे का उत्पादन हो रहा है। कमरूघाटी की चच्योट पंचायत के शाह गांव में बागवान दुर्योधन सिंह और मनोज कुमार ने सौ पौधों का संतरे का बगीचा तैयार किया है। तीन साल पहले शाह गांव के बागवानी विभाग से सेवानिवृत्त बागवान दुर्योधन सिंह और उनके बेटे मनोज कुमार ने पालमपुर विवि से संतरे के 150 पौधे लाए थे। इन बागवानों ने इनकी खेती कर संतरे का बगीचा तैयार कर यहां मिसाल कायम की है।
बर्फ का क्षेत्र होने के कारण यहां संतरे का बगीचा तैयार करना जोखिम था। मगर बागवानी महकमे में काम करने का अनुभव और बगीचे की जानकारी होने के कारण बागवान दुर्योधन सिंह ने ठंडे इलाके में संतरे का बगीचा तैयार करके दिखाया है। उनके बेटे मनोज कुमार ने बताया कि बर्फ पड़ने के कारण शुरू में उनके बगीचे में संतरे के पौधों को नुकसान पहुंचा था। मगर अब तीन साल होने पर उनके बगीचे में पेड़ बड़े-बड़े हो गए हैं।
जिससे पौधे अब फल भी देने लग गए हैं। उन्होंने बताया कि संतरे का एक पौधा 100 किलो संतरे का उत्पादन दे रहा है। इसकी बाजार में भी अच्छी मांग है। नाचन फल सब्जी उत्पादक संघ के उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर ने कहा है कि सरकार को ऐसे बागवानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
क्षेत्र के बागवानों यशवंत, हरीश, बीके ठाकुर, धमेश्वर, यादविंदर, वेद प्रकाश और मुरारी लाल ने मांग की है कि बागवानी विभाग जागरूकता शिविर लगाकर बागवानों को आधुनिक खेती के बारे में जागरूक करे ताकि बागवान स्वावलंबी बन सकें। उद्यान विषयवाद विशेषज्ञ बगस्याड़ डॉ. चिंत राम ठाकुर ने कहा कि बागवानों ने सफलता की मिसाल कायम की है।