फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal News: Barley storage in clay rooms for emergency in Lahaul spiti

आपात समय के लिए मिट्टी के कमरों में कर रहे जौ का भंडारण

Sat, 13 Feb 2021 12:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर दिनेश जस्पा, अमर उजाला नेटवर्क, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
दिनेश जस्पा, अमर उजाला नेटवर्क, उदयपुर (लाहौल-स्पीति) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 13 Feb 2021 12:30 PM IST
विज्ञापन
Himachal News: Barley storage in clay rooms for emergency in Lahaul spiti
जौ की फसल से भरा गया चैंबर। - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के लोग आज भी पारंपरिक फसलों जौ (नेह) का आपात समय के लिए भंडारण कर रहे हैं। यह भंडारण एक या दो साल के लिए नहीं, बल्कि 25 से 30 साल तक के लिए कोल्ड स्टोर की भांति मिट्टी से बने कमरों में किया जाता है। जौ को बंद कमरे में रखने के लिए दो से तीन चैंबर बनाए जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। बता दें कि स्पीति घाटी में करीब 2750 घर हैं। हर साल 800 से 900 हेक्टेयर में लोग जौ की फसल का उत्पादन करते हैं।

विज्ञापन


अपर स्पीति में नकदी फसल मटर के साथ जौ की खेती होती है, जबकि लोअर स्पीति में इन फसलों के साथ सेब व सब्जी का उत्पादन होता है। रबी फसल जौ के खाने से कई फायदे हैं। इसमें फायवर की मात्रा भी ज्यादा है। इसके सेवन से कई रोगों पर नियंत्रण होता है। स्पीति घाटी में आज भी पारंपरिक खेती जौ की फसल को लोगों ने जिंदा रखा है।
विज्ञापन


इस फसल के उत्पादन में लोग रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं करते हैं। स्पीति के किसान महज गोबर की खाद का प्रयोग करते हैं। स्पीति निवासी वीर वैद्य, पलजोर बौद्ध, लामा टशी और वंज्ञाल ने कहा कि स्पीति के बड़े किसान हर साल 15 से 20 क्विंटल तक जौ का भंडारण करते हैं। इस अनाज का धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। इसे आपात समय के लिए भी भंडारण किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके लिए पहले से लोगों ने घरों में अनाज भंडारण के लिए कक्ष तैयार कर रखे हैं। स्पीति के लोग इस अनाज को पत्थर के बड़ी चक्की में पीसकर तैयार करते थे। उसके बाद पानी के घराट व अब बिजली से चलने वाली घराटों से सत्तू तैयार किया जा रहा है।


स्पीति के लोसर में बुधवार को हुए स्नो फेस्टिवल के दौरान स्थानीय महिलाओं ने बाकायदा प्रदर्शनी में यह दिखाया कि प्राचीन काल में स्पीति के लोग किस तरह से जौ की फसल से सत्तू तैयार करते हैं। काजा में तैनात कृषि अधिकारी डॉ. अनिल बौद्ध ने बताया कि स्पीति में करीब 800 से 900 हेक्टेयर में जौ की खेती होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed