हिमाचल: चार दिन बाद बहाल हुआ नेशनल हाईवे-5, आठ जिलों को जोड़ने वाला एनएच अभी भी ठप
नेशनल हाईवे प्राधिकरण, सीमा सड़क संगठन, जेएसडब्ल्यू और लोक निर्माण विभाग ने 52 घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद बीती रात करीब 12 बजे हाईवे को बहाल किया। यातायात ठप होने से किन्नौर, काजा और स्पीति के हजारों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के चौरा में बीते चार दिनों से बंद नेशनल हाईवे-पांच शुक्रवार रात दो बजे लंबी जदोजहद के बाद यातायात के लिए बहाल हो गया है। एनएच बहाल होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे जिले के हजारों लोगों और खासकर बागवानों ने राहत की सांस ली है। नेशनल हाईवे बाधित होने से एनएच पर पिछले चार दिन से मटर और सेब की फसल फंसी हुई थी, जिसके सड़ने का खतरा बढ़ रहा था। हाईवे बहाल होने से अब फसल देश की विभिन्न मंडियों के लिए रवाना हो गई है। वहीं देश-विदेश से किन्नौर पहुंचने वाले पर्यटकों ने भी राहत की सांस ली है। बीते मंगलवार को रात करीब नौ बजे चौरा में पहाड़ी से भारी भरकम चट्टानों के दरकने से एनएच पर वाहनों की आवाजाही अवरुद्ध हो गई थी।
एनएच प्राधिकरण ने चार दिन की कड़ी मशक्कत के बाद मार्ग बहाल करने में सफलता हासिल की है। मार्ग बहाल होने के बाद सेब और मटर से लदे ट्रकों सहित वाहनों को जिला प्रशासन, पुलिस और एनएच प्राधिकरण की मौजूदगी में रवाना किया गया। नेशनल हाईवे प्राधिकरण, सीमा सड़क संगठन, लोक निर्माण विभाग और जेएसडबल्यू प्रबंधन के संयुक्त सहयोग 76 घंटे की जदोजहद के बाद आखिरकार हाईवे बहाल कर दिया गया है। एनएच पर को खोलने के लिए चट्टानों को ब्लास्ट कर तोड़ा गया और इसके बाद हाईवे से पत्थरों को हटाया गया। एनएच प्राधिकरण के एक्सईएन केएल सुमन ने बताया कि मंगलवार से बाधित एनएच को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। अब यहां वाहनों की बराबर आवाजाही हो रही है।
उधर, हिमाचल के आठ जिलों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय उच्च मार्ग-205 के घंडल के पास धंसने के पांचवें दिन भी ठप है। राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सड़क से मलबा निकलाने का कार्य शुरू कर दिया है। शिमला से निचले हिमाचल को जाने के लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक रूट चार्ट जारी किया है। इसमें शिमला आने के लिए बंगोरा, कालीहट्टी, नालहट्टी, घणाहट्टी और निचले हिमाचल के लिए घणाहट्टी, कंडा, पनेश, कोहबाग, रंगोल रूट तय किया है। सेदन-शकराह-पक्की बावड़ी संपर्क मार्ग को भी छोटे वाहनों के लिए तय है। डीसी आदित्य नेगी ने इस बाबत अधिसूचना जारी की है। एनएचएआई ने 13 सितंबर की रात को घंडल के पास धंसी सड़क का नए सिरे से डिजाइन बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। सड़क का करीब 80 मीटर हिस्सा धंसा है। भूगर्भ वैज्ञानिकों की तीन स्तरीय कमेटी दो दिन से चट्टानों की जांच (टेस्टिंग) कार्य में जुटी है।
चट्टानों और मिट्टी के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे हैं। सड़क की पहाड़ी से पानी का रिवास लगातार हो रहा है। ऐसे में रिपोर्ट आने के बाद ही एनएच मरम्मत कार्य शुरू करेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के निचले हिस्सों से दर्जनों मरीज आईजीएमसी रेफर किए जाते हैं। लेकिन एनएच के धंसने के बाद करीब 10 से 15 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त सफर मरीजों पर भारी पड़ सकता है। लोगों ने एनएच का मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एसके शर्मा ने बताया कि एनएच पर करीब 80 मीटर लंबा और 30 मीटर ऊंचा डंगा लगेगा। रिपोर्ट आने के बाद ही मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। एनएचएआई ने एक कंपनी को सड़क के मरम्मत कार्य की जिम्मेदारी सौंपी है। अब चट्टानों, मिट्टी के सैंपल की रिपोर्ट आने का इंतजार है। इसके बाद कंपनी सड़क का मरम्मत कार्य शुरू करेगी।