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HP High Court: उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़ेगा, एकमुश्त वित्तीय लाभ नहीं देना आदेशों की अवमानना

Sat, 29 Mar 2025 11:01 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 29 Mar 2025 11:01 AM IST
सार

अदालत ने कहा कि जब तक सरकार नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करेगी, तब तक वर्तमान अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे। 

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Himachal High Court: Tenure of Consumer Commission Chairman will be extended, not giving lump sum financial be
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाने के आदेश को पारित किए हैं। अदालत ने कहा कि जब तक सरकार नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करेगी, तब तक वर्तमान अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे। आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को 4 अप्रैल तक आयोग के दो सदस्यों की नियुक्ति करने के आदेश भी दिए हैं। आयोग में सदस्य के पद पिछले दो वर्षों से खाली पड़े हैं। अदालत ने कहा कि सरकार ने सदस्यों के चयन प्रक्रिया अक्तूबर 2024 में पूरी कर दी है। उसके बावजूद नियुक्ति नहीं की गई है। हाईकोर्ट में इसे लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में कहा है कि राज्य उपभोक्ता आयोग खाली रहेगा तो इसका असर आम लोगों और वादियों पर पड़ेगा। स्टेट कमीशन में मामलों का निपटारा जल्द नहीं हो पाएगा। प्रदेश सरकार को छह महीने पहले ही चयन प्रक्रिया पूरी कर देनी चाहिए थी, जोकि अभी तक शुरू नहीं की गई। इसी पर हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किए हैं।

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एकमुश्त वित्तीय लाभ नहीं देना आदेशों की अवमानना : हाईकोर्ट
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों का अनुपालन न करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि सरकारी निर्देशों की आड़ में कोर्ट के आदेशों की अहवेलना की जा रही है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने अनुपालना याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के कुछ विभाग हाईकोर्ट की ओर से पारित निर्णय को दबाए बैठे हैं और याचिकाकर्ताओं के देय वित्तीय लाभों को एकमुश्त के बजाय किस्तों में दे रहे हैं। खंडपीठ ने कहा कि ऐसा जाहिर तौर पर हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव की ओर से 7 जनवरी 2012 को जारी निर्देशों के मद्देनजर किया जा रहा है। विभागों की ओर से ऐसी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशों की घोर अवमानना है। विशेषकर तब, जब हाईकोर्ट ने विभागों को किस्तों में राशि जारी करने का निर्देश नहीं दिया है। खंडपीठ ने कहा कि सरकार की ओर से जारी निर्देश केवल वही लागू होंगे, जहां  न्यायालय की ओर से कोई आदेश न दिए गए हों या न्यायालय ने स्वयं विभागों को 7 जनवरी 2012 की अधिसूचना का संज्ञान लेने के बाद किस्तों में राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया हो। कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी। इसके साथ ही प्रतिवादियों को 4 फरवरी 2025 को जारी निर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता को किस्तों की बजाय संपूर्ण बकाया राशि एकमुश्त जारी करने को कहा है।

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