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हिमाचल हाईकोर्ट: कर्मचारी संघ की सिफारिश पर होने वाले तबादले गैर कानूनी
Sat, 09 Oct 2021 04:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 09 Oct 2021 04:49 PM IST
सार
कोर्ट ने आदेश दिए कि कोर्ट की रजिस्ट्री इस आदेश की प्रति हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव को सरकार के सभी विभागों, सभी बोर्डों, निगमों आदि को निर्देश जारी करने के लिए भेजे।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बिजली बोर्ड के कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों की सिफारिश पर किए जा रहे तबादला आदेश को गैर कानूनी पाते हुए कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्तिगत कर्मचारी, अधिकारी या मान्यता प्राप्त अथवा गैर मान्यता प्राप्त संघ का पदाधिकारी किसी को भी जबरदस्ती या डराने धमकाने या अनुशासनहीन कृत्यों या व्यवहार में लिप्त होता है तो नियोक्ता उसके खिलाफ हमेशा कानूनी तौर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होता है।
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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बोर्ड, निगम या कोई अन्य संस्थान जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 और 226 के तहत राज्य की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं। किसी भी व्यक्ति विशेष अथवा संघ या संगठन की ओर से की गई सिफारिशों पर विचार करने और निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आइंदा कर्मचारी संघ या यूनियन की सिफारिश संबंधी मामला कोर्ट के समक्ष आता है, जिसमें कर्मचारी की सहमति न हो तो संघ या यूनियन को अन्य कार्यवाही के अलावा अयोग्य ठहरा दिया जाएगा।
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कोर्ट ने आदेश दिए कि कोर्ट की रजिस्ट्री इस आदेश की प्रति हिमाचल सरकार के मुख्य सचिव को सरकार के सभी विभागों, सभी बोर्डों, निगमों आदि को निर्देश जारी करने के लिए भेजे। न्यायालय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सुशील कुमार के मामले में दिए गए निर्णय का कर्मचारी संघों या यूनियनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। वे खुले तौर पर गैर सहमति तबादले के लिए सिफारिशें करना जारी रखे हुए हैं, जैसा कि इस मामले के तथ्यों से स्पष्ट है। न्यायालय ने हालांकि समय से पहले दायर याचिका को खारिज कर दिया।
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