दबाव में सरकार, नए बिजली कनेक्शनों पर पुरानी सिक्योरिटी राशि ही लेने की तैयारी
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हिमाचल में नए बिजली कनेक्शनों पर बढ़ाई गई कई गुना सिक्योरिटी राशि को सरकार वापस लेने की तैयारी में है। प्रदेश भर में हो रहे विरोध के बाद दबाव में आई सरकार पुराने रेट ही बहाल करेगी। नए रेट लागू नहीं करने को सरकार हाईकोर्ट से स्टे लेगी। मंगलवार को राज्य सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने कहा कि बद्दी के एक उद्योग से रिकवरी नहीं होने के मामले में बिजली बोर्ड ने जल्दबाजी में एडवांस कंज्यूमर डिपॉजिट (सिक्योरिटी राशि) बहुत अधिक बढ़ा दिया है। जनता पर इसका बोझ न पड़े, इसके लिए बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने बताया कि बोर्ड को बद्दी का एक उद्योग प्रबंधक चूना लगाकर चला गया। इसकी रिकवरी को मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट की ओर से टिप्पणी की गई कि बिजली मीटर के लिए तय सिक्योरिटी बहुत कम है।
जब कोई उद्योग प्रबंधक चला जाता है तो उसकी सिक्योरिटी से रिकवरी करना मुश्किल है। कोर्ट ने सरकार को इस बाबत नीति बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके चलते बोर्ड ने नए मीटर कनेक्शन पर दाम बढ़ाए हैं। ऊर्जा मंत्री ने स्वीकार किया कि राशि को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया। अब इसको लेकर कोर्ट में स्टे याचिका दायर करेंगे। नए मीटर के अधिक दाम का बोझ जनता पर न पड़े, इसके लिए पुरानी नीति बहाल करेंगे। जो उपभोक्ता पैसे नहीं चुका रहे हैं, उनके लिए विचार-विमर्श करके अलग नीति बनाई जाएगी। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि प्रदेश भर में बोर्ड की करीब सौ करोड़ की लेनदारी है। इसमें सबसे ज्यादा उद्योगों से 55 करोड़ लेना है करीब पांच हजार उपभोक्ता कनेक्शन काटकर चले गए हैं। बोर्ड को इसका घाटा उठाना पड़ रहा है। लॉकडाउन में भी बोर्ड को करोड़ों का नुकसान हुआ है। अब कुछ सुधार होना शुरू हुआ है।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
अमर उजाला ने 31 अक्तूबर के अंक में हिमाचल में नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ चार गुना महंगा शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बढ़ोतरी का खुलासा किया था। खबर के माध्यम से बताया था कि बिजली बोर्ड ने घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक कनेक्शनों पर एडवांस कंज्यूमर डिपॉजिट में भारी बढ़ोतरी कर दी है। घरेलू कनेक्शन के लिए 360 रुपये प्रति किलोवॉट की जगह उपभोक्ताओं को 1158 रुपये चुकाने पड़ेंगे।
औद्योगिक इकाइयों के कनेक्शन प्रति केवीए एक हजार रुपये से बढ़ाकर 4882 रुपये हो गया है। लघु एवं सूक्ष्म उद्योग, स्ट्रीट लाइट, वाटर पंप और अस्थायी मीटरों की राशि में भी बढ़ोतरी हुई है। बिजली बोर्ड की इस कार्यप्रणाली का प्रदेश भर में विरोध जारी है। जयराम सरकार की इसको लेकर फजीहत हो रही है।