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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Directorate of Education: Students who drop out in the middle will also get certificate, diploma and degree

हिमाचल शिक्षा निदेशालय: बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को भी मिलेंगे प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और डिग्री

Thu, 21 Apr 2022 10:06 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 21 Apr 2022 10:06 PM IST
सार

अब किन्हीं कारणों से बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को भी सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री मिलेगी। प्रदेश के कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होगी। 

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Himachal Directorate of Education: Students who drop out in the middle will also get certificate, diploma and degree
उच्च शिक्षा निदेशालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब किन्हीं कारणों से बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को भी सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री मिलेगी। प्रदेश के कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होगी। कॉलेजों को नैक से मान्यता लेना और शोध एवं विकास सैल बनाना अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने सभी कॉलेज प्रिंसिपलों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए पत्र जारी कर दिया है। कॉलेज में पढ़ने वाला विद्यार्थी अगर एक साल पढ़ाई छोड़ता है तो उसे सर्टिफिकेट मिलेगा। दो साल बाद पढ़ाई छोड़ने पर डिप्लोमा मिलेगा। तीन साल बाद डिग्री और चार साल बाद इंटिग्रेटेड डिग्री मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधान स्कूलों में लागू कर दिए गए हैं।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया जा रहा है। कॉलेजों में नए सत्र से इसे लागू किया जाएगा। शिक्षा नीति के तहत कॉलेज में पढ़ने वाले हर छात्र का अकादमिक बैंक ऑफ  क्रेडिट बनेगा। यह एक वर्चुअल स्टोर हाउस होगा। इसमें हर विद्यार्थी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय को अकादमिक बैंक ऑफ  क्रेडिट स्कीम में अपना पंजीकरण करना होगा। नौकरी करने वालों के लिए तीन साल की डिग्री और शोध के क्षेत्र में रुचि रखने वालों को चार साल की दी जाएगी। क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम भी लागू किया जाएगा। विद्यार्थी अपनी इच्छा के अनुसार विषय ले सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित पढ़ाई भी कॉलेजों में करवाई जाएगी। रोजगार के अवसर बढ़ाने वाले कोर्स शुरू किए जाएंगे।

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