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हिमाचल कैबिनेट: नई आबकारी, टोल नीति को मंजूरी, 16 फीसदी सस्ती होगी देसी शराब

Sun, 20 Mar 2022 09:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 20 Mar 2022 09:26 PM IST
सार

बैठक में वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य में प्रति इकाई चार प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क पर खुदरा आबकारी ठेकों के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई।

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Himachal Cabinet Meeting: New Excise Policy Stamped, Toll Tax Barriers Decided
हिमाचल कैबिनेट की बैठक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में रविवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में वर्ष 2022-23 के लिए बहुप्रतीक्षित आबकारी नीति को मंजूरी मिल गई। प्रदेश में अब देसी शराब 16 फीसदी सस्ती होगी। इसके लिए लाइसेंस फीस कम होगी। कैबिनेट ने फैसला लिया कि इस वर्ष शराब के ठेके नीलाम नहीं होंगे। कैबिनेट ने हिमाचल प्रदेश पथकर नीति को भी मंजूरी दी है, जिसमें राज्य में सभी पथकर बैरियर की नीलामी और निविदा शामिल हैं।

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वर्ष 2022-23 के दौरान 2,131 करोड़ रुपये के राजस्व प्राप्ति की परिकल्पना की गई है, जो वित्त वर्ष 2021-22 से 264 करोड़ रुपये अधिक होगा। यह राज्य आबकारी राजस्व में 14 प्रतिशत की कुल वृद्धि को दर्शाता है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य में प्रति इकाई चार प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क पर खुदरा आबकारी ठेकों के नवीनीकरण को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य सरकारी राजस्व में पर्याप्त बढ़ोतरी प्राप्त करना और पड़ोसी राज्यों में दाम कम करके होने वाली देसी शराब की तस्करी पर रोक लगाना है। 
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खुली बोली से होगी टोल बैरियरों की नीलामी
प्रदेश में खुली बोली के तहत टोल बैरियरों की नीलामी होगी। बीते साल टोल बैरियरों का नवीनीकरण किया था। अब इनकी खुली नीलामी करने का कैबिनेट ने निर्णय लिया है। नई नीति में यही व्यवस्था की गई है।
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एंडटूएंड ऑनलाइन आबकारी प्रशासन प्रणाली होगी स्थापित 
शराब बॉटलिंग प्लांटों, थोक और खुदरा विक्रेताओं में पाई गई अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए आबकारी अधिनियम 2011 को सख्त किया गया है। राज्य में एक प्रभावी एंडटूएंड ऑनलाइन आबकारी प्रशासन प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिसमें शराब की बोतलों की ट्रैक एंड ट्रेस की सुविधा के अलावा निगरानी के लिए अन्य मॉडयूल शामिल होंगे।

मधुमक्खी, रंगड़ और बंदर के काटने से मौत होने पर परिजनों को मिलेगा चार लाख मुआवजा
हिमाचल प्रदेश आपदा राहत नियमावली-2012 में संशोधन करने को कैबिनेट ने स्वीकृति दी है। इसके तहत मधुमक्खियों-रंगड़ों-ततैया और बंदरों के काटने से होने वाली मौतों पर भी अब सरकार परिजनों को चार लाख रुपये मुआवजा देगी। अभी तक सिर्फ दुर्घटनावश डूबने और वाहनों की दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों पर ही चार लाख रुपये मुआवजा मिलता है। बजट सत्र में भी विधानसभा में यह मामला प्रमुखता से उठाया था। 


प्रदेश के आपदा राहत मैनुअल में अभी तक प्रदेश में मधुमक्खी, रंगड़ और बंदरों के काटने से मौत पर मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्रदेश में मधुमक्खी, रंगड़ और बंदरों के काटने से कई बार लोगों की मौत हो जाती है, लेकिन पहले पीड़ित परिवारों को राहत के तौर पर कोई मुआवजा नहीं मिलता था। राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि अब सरकार ऐसी मौतों पर भी परिजनों को चार लाख मुआवजा देगी।

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