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हिमाचल प्रदेश: प्रज्ज्वल से पहले भी गुटबाजी की बलि चढ़ चुके हैं कई भाजपा नेता
Sat, 02 Oct 2021 01:22 PM IST
अरविन्द ठाकुर
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:22 PM IST
सार
इस बार प्रज्ज्वल बस्टा गुटबाजी की बलि चढ़ गई हैं। दो दिन पहले पार्टी ने जुब्बल कोटखाई की नेता को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया, लेकिन दूसरे गुट ने अपनी चाल चल नियुक्ति को फिलवक्त रुकवा दिया।
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भाजपा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश भाजपा की अंदरूनी कलह ने एक बार फिर अपने ही नेताओं के लिए हालात मुश्किल कर दिए हैं। यह पहली बार नहीं है, जब पार्टी और सरकार में बैठे नेताओं के बीच तालमेल न होने से ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने नेताओं और पार्टी दोनों की फजीहत करा दी। 2018 में सरकार बनने के साथ ही भाजपा नेता सुरेंद्र ठाकुर को कामगार कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करने की अधिसूचना जारी हो गई, लेकिन सरकार से निर्देश मिल गए कि वह ज्वाइन न करें। तब से वह एडजस्टमेंट की राह ताकते रहे, लेकिन उस पद पर तीन साल बाद एक अन्य नेता की नियुक्ति कर दी गई।
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पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। पहले उन्हें सांविधानिक पद से हटाकर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन सियासी समीकरण ऐसे बिगड़े कि एक ऐसे मामले में उनका नाम घसीट दिया गया कि पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ गया। हाल ही में भाजपा महिला मोर्चा में जिन तत्कालीन आईटी समन्वयक अर्चना ठाकुर को पार्टी ने बाहर किया उन्हें पहले भी कुल्लू में हुए एक विवाद के बाद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, लेकिन पार्टी के ही धड़े ने पैरवी कर विवादों के बीच उनकी दोबारा वापसी करा दी, लेकिन गुटबाजी जारी रही और उनका तत्कालीन महामंत्री शीतल व्यास के साथ विवादित ऑडियो वायरल हो गया जिसमें पैसे देकर पद पाने जैसे आरोप भी उछल गए।
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मजबूरन पार्टी को दोनों को ही पार्टी से बाहर करना पड़ा। अब इस बार प्रज्ज्वल बस्टा गुटबाजी की बलि चढ़ गई हैं। दो दिन पहले पार्टी ने जुब्बल कोटखाई की नेता को प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया, लेकिन दूसरे गुट ने अपनी चाल चल नियुक्ति को फिलवक्त रुकवा दिया। यह ऐसे समय में हुआ जब पार्टी के लिए जुब्बल कोटखाई में उपचुनाव में दोबारा जीत हासिल करने की चुनौती है।
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