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हिमाचल विधानसभा सत्र: कानून तोड़कर ट्यूबवेल लगाने वालों को अब पांच साल की कैद नहीं, विधेयक पारित

Thu, 06 Apr 2023 07:06 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 06 Apr 2023 07:06 PM IST
सार

गुरुवार को उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में इसके लिए हिमाचल प्रदेश भूगर्भ जल विकास और प्रबंधन का विनियमन और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2023 को सदन में पारित करने का प्रस्ताव किया। इसके लिए 2005 के अधिनियम की धारा- 21 में संशोधन का प्रस्ताव रखा।

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Himachal Assembly Session: Those who install tube wells by breaking the law are no longer imprisoned for five
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानून तोड़कर ट्यूबवेल लगाने वालों को अब कैद नहीं होगी। इसके लिए कानून में पांच साल जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। अब अवहेलना की अवधि में प्रतिदिन पांच हजार रुपये के हिसाब से अधिकतम दस लाख तक जुर्माना लगेगा। यह प्रावधान उद्योगों की स्थापना के दौरान कानून तोड़कर ट्यूबवेल लगाने के दृष्टिगत किया गया है। किसानों-बागवानों और हैंडपंपों को इससे बाहर रखा गया है। यानी, इन पर दस लाख रुपये का कानूनी प्रावधान लागू नहीं होगा। सदन में इस विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव करने से पहले उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि ट्यूबवेल लगाने के लिए जो आवेदन करेगा, उसे 60 दिन में अनुमति नहीं दी तो यह डीम्ड मंजूरी मानी जाएगी।

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विपक्ष की ओर से चर्चा के दौरान सजा घटाने पर आपत्ति करने के बाद इस विधेयक को सदन में ध्वनिमत से पारित किया गया। गुरुवार को उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में इसके लिए हिमाचल प्रदेश भूगर्भ जल विकास और प्रबंधन का विनियमन और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2023 को सदन में पारित करने का प्रस्ताव किया। इसके लिए 2005 के अधिनियम की धारा- 21 में संशोधन का प्रस्ताव रखा। इस पर सदन में चर्चा हुई। चुराह के भाजपा विधायक हंसराज ने कहा कि जुर्माना बढ़ाया गया है। ग्लोबल वार्मिंग से भारत सरकार भी आशंकित है। प्रभावशाली लोग इससे दोहन करेंगे। इसमें सजा का प्रावधान होना चाहिए। उद्योगपतियों के लिए 10 लाख देना मुश्किल नहीं है। इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए।
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भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति हैंडपप लगाए और अपनी पानी की पूर्ति को पूरा करने के लिए ऐसा करे तो उसे भी जुर्माना लगाए तो यह सही नहीं होगा। केएल ठाकुर ने कहा कि पानी के रिचार्ज पर ध्यान रखने की जरूरत थी। वरना बड़ी दिक्कत हो जाएगी। 10 लाख का जुर्माना आदमी के लिए ज्यादा होगा। उद्योगपति इसका ज्यादा दोहन कर सकते हैं। विनोद कुमार ने कहा कि यह जुर्माना पीने के पानी और सिंचाई पर नहीं होना चाहिए। उद्योग के मामले में ही होना चाहिए। सुखराम चौधरी ने कहा कि उनसे निवेदन है कि दिल्ली की प्यास हिमाचल बुझा रहा है। राजस्थान में हरियाली ला रहा है। 87 प्रतिशत इलाका असिंचित है। किसानों की आमदनी दोगुना करना चाहते हैं तो 10 लाख रुपये का जुर्माना बहुत ज्यादा है।
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जयराम ठाकुर ने कहा कि यह बिल बहुत जल्दबाजी में लाया गया है। जुर्माना दोगुना कर दिया। कैद को हटा दिया। जब वाणिज्यिक यूनिट है। उसके लिए 10 लाख कुछ भी नहीं हैं। कैद का प्रावधान हटाया है। इससे एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव रहता था। कैद बेशक पांच नहीं, दो साल करें। अधिकांश सदस्यों से सुझाव यही आ रहे हैं कि गांव में रहने वाले किसान और बागवान के लिए इसे न करें। वाणिज्यिक इस्तेमाल में सजा का प्रावधान करें। पैसा इसमें मायने नहीं रखता है। मुकेश ने कहा कि ये पुराना कानून है। जुर्माने में कोई बढ़ोतरी नहीं है। ये उतना ही यानी दस लाख है। हैंडपंप में छूट दी गई है। किसानी-बागवानी भी इससे बाहर है। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि न तो हैंडपंप और किसानी-बागवानी पर यह जुर्माना होगा। यह उद्योगों के लिए ही होगा।

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