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High Court Decision: एंबुलेंस सेवा यूनियन कर्मियों को दी उचित न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता

Thu, 19 May 2022 08:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 19 May 2022 08:05 PM IST
सार

 न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने 108 और 102 सेवा यूनियन के कर्मचारियों को अपनी मांगों को उचित न्यायालय के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्रता दी है। याचिका में आरोप लगाया था कि जीवीके कंपनी का ठेका समाप्त होने पर सरकार ने एंबुलेंस चलाने का जिम्मा नए ठेकेदार को दिया है।

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High Court gave Freedom to approach the appropriate court to the ambulance service union workers
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से 108 और 102 एंबुलेंस चलाने के लिए नया ठेका देने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया है। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने 108 और 102 सेवा यूनियन के कर्मचारियों को अपनी मांगों को उचित न्यायालय के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्रता दी है। याचिका में आरोप लगाया था कि जीवीके कंपनी का ठेका समाप्त होने पर सरकार ने एंबुलेंस चलाने का जिम्मा नए ठेकेदार को दिया है। नए ठेकेदार ने याचिकाकर्ता यूनियन के कर्मचारियों को सेवा में रखने से मना कर दिया है। नए ठेकेदार की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार की ओर से उसे सिर्फ 293 एंबुलेंस ही दी गई हैं।

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इनमें जीवीके में कार्यरत 97 फीसदी कर्मचारियों को नौकरी पर रख लिया गया है। यदि सरकार और एंबुलेंस मुहैया करवाती है तो पुराने ठेकेदार के सभी कर्मचारियों को सेवा में रखा जाएगा। यूनियन के कर्मचारियों ने अदालत से यह भी गुहार लगाई थी कि राज्य के सभी एंबुलेंस कर्मचारियों को नियमित किए जाने के बारे में आदेश पारित किए जाएं। इनकी अस्थायी नौकरी को स्थायी करने की नीति बनाई जाए। मालूम रहे कि108 और 102 एंबुलेंस में कार्यरत ड्राइवर और तकनीशियन सरकार से अपनी सेवाओं को स्थायी करने के लिए कई वर्षों से मांग कर रहे हैं।
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यूनियन की मांगें हैं कि राज्य के सभी एंबुलेंस कर्मचारियों को हरियाणा राज्य के 108 एंबुलेंस कर्मचारियों की तरह अधीनस्थ किया जाए। जिन 108 कर्मचारियों ने सरकारी खर्चे पर प्रशिक्षण लिया है, उनको प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। समान काम का समान वेतन समस्त कर्मचारियों में लागू हो, एंबुलेंस कर्मचारियों की अस्थायी नौकरी को स्थायी करना सुनिश्चित किया जाए। कर्मचारियों को ठेकेदारी प्रथा से मुक्त किया जाए। कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की घटना होने पर परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी मिले और परिवारवालों को मुआवजा भी मिले।

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