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Himachal: सीएम सुक्खू बोले- केंद्र हमारा पैसा रोक सकता है, पर हम विकास को नहीं रुकने देंगे
Wed, 14 Jun 2023 08:33 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 14 Jun 2023 08:33 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र ने कर्ज की सीमा को घटा दिया है। इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। संघर्ष कर और भी कड़ी मेहनत की जाएगी।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसी भी चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार तैयार है। कर्ज के बोझ के तले दबने के बाद भी यही वे अधिकारी हैं, जिनसे सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों को ओपीएस दिया है। सुक्खू ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि एक भी विभाग बता दें कि वहां कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। एक भी महकमा बता दें, जहां विकास के कार्य को अमलीजामा नहीं पहनाया गया हो।
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वे घबरा रहे हैं कि जिस तेजी से राज्य सरकार काम कर रही है तो उनके पास कहने को कुछ नहीं है। ठीक है, केंद्र सरकार पैसे रोक सकती है। केंद्र ने कर्ज की सीमा को घटा दिया है। साढे़ 14 हजार करोड़ रुपये से कर्ज की सीमा साढे़ आठ हजार करोड़ रुपये कम कर दी गई है। इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। संघर्ष कर और भी कड़ी मेहनत की जाएगी।
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बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश की रॉयल्टी का मामला पड़ोसी राज्यों, केंद्र से उठाएंगे
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि जब पंजाब था तो हिमाचल और हरियाणा उसके हिस्से थे। भारत सरकार ने इसे बनाया था। इसमें हिमाचल का भी शेयर है। अभी बीबीएमबी में हिमाचल प्रदेश की रॉयल्टी भी है। हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी से एक भी प्रतिशत रॉयल्टी नहीं मिलती है।
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इस बारे में पंजाब, हरियाणा के मुख्यमंत्रियों के अलावा भारत सरकार से भी बात करेंगे। बीबीएमबी में ही नहीं, एसजेवीएनएल में भी शेयर मांग रहे हैं। हाइड्रो के अलावा हिमाचल प्रदेश में कुछ नहीं है। सरकार का दायित्व है कि वह अपनी बात रखे। हर चीज में रोकते रहेेंगे तो हिमाचल में और क्या है।
अधिकारियों को राज्य में रोपवे की निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत नई सड़क परियोजनाओं में सुरंगों के निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे यात्रियों के समय और धन की बचत होगी। उन्होंने अधिकारियों को राज्य में रोपवे की निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। कहा कि राज्य में वर्तमान सरकार के गठन के बाद छह महीने में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के तहत 336 करोड़ रुपये की लागत की 62 सड़कों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। सीएम ने यह जानकारी लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुई दी।
पीएमजीएसवाई फेज-3 की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के लिए 422 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की 45 सड़कों की डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है। इनमें से 44 सड़कों के टेंडर पहले ही दिए जा चुके हैं। दूसरे चरण में 2662 करोड़ रुपये की लागत की 256 और सड़कों की डीपीआर स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजी गई है। इनमें से 644 किलोमीटर सड़कें एफडीआर तकनीक से निर्मित की जाएंगी। दूसरे चरण में 14 पुलों का निर्माण भी केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए लंबित है।
राज्य सरकार ने शिमला शहर के सर्कुलर रोड पर भीड़भाड़ कम करने के लिए 97 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। बैठक के दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सभी विभागीय कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-1 के तहत लंबित 173 सड़क परियोजनाओं और दूसरे चरण में 17 सड़क परियोजनाओं को इसी वर्ष पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सड़क रखरखाव योजना के लिए इस वर्ष 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।