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हिमाचल: हाथ से फिसल सकता है 2,000 करोड़ का निवेश, कंपनियों ने रखी 50 फीसदी इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की शर्त, सरकार ने किया इनकार

Thu, 23 Dec 2021 10:45 AM IST
अरविन्द ठाकुर धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
धर्मेंद्र पंडित, अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Thu, 23 Dec 2021 10:45 AM IST
सार

प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार बसें खरीदने में असमर्थ है। ऐसे में दोनों कंपनियों ने कर्नाटक में उद्योग लगाने की बात कही है। वहां की सरकार ने शर्त को मान लिया है। 

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electric bus company MOU with himachal pradesh govt in Mandi
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के हाथ से 2,000 करोड़ रुपये का निवेश फिसल सकता है। समझौता ज्ञापन (एमओयू) से पहले संयुक्त रूप से काम करने वाली दोनों कंपनियों ने प्रदेश सरकार के सामने 50 फीसदी इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की शर्त रख दी है। सरकार ने इससे साफ इनकार किया है। लिहाजा, अब एमओयू पर संशय है। ऐसे में रोजगार का इंतजार कर रहे 3,000 लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।    

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सूत्रों के अनुसार यह एमओयू 27 दिसंबर को मंडी में आयोजित होने वाले सेकंड ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी समारोह में होना था। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार बसें खरीदने में असमर्थ है। ऐसे में दोनों कंपनियों ने कर्नाटक में उद्योग लगाने की बात कही है। वहां की सरकार ने शर्त को मान लिया है। 
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हंगरी ग्रुप एमएस सीएसईपीईएल होल्डिंग कंपनी और न्यू इंडिया एसराम एमराम कंपनी ने संयुक्त रूप से प्रदेश में इलेक्ट्रिक बस उद्योग स्थापित करने की हामी भरी थी। इससे 3,000 युवाओं को रोजगार मिलना था। उद्योग विभाग ने कंपनी के लिए जिला कांगड़ा के चनौर और जिला ऊना के जीरकपुर बरैडी और कंदरोड़ी में 200 बीघा जमीन चयनित की है। कंपनियों के अधिकारियों ने जमीन को भी देख लिया है। 
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8,000 इलेक्ट्रिक बसें की जानी थी तैयार 
हिमाचल में 8,000 इलेक्ट्रिक बसों सहित चार्जिंग स्टेशन, बैटरियां और स्पेयर पार्ट्स तैयार किए जाने थे। हंगरी कंपनी ने विदेशों में कई इलेक्ट्रिक उद्योग लगाए हैं। हिमाचल में उनका यह पहला उद्योग स्थापित होना था। बसें बनाने के लिए कच्चा माल भी विदेशों से लाया जाना था। 


सेकंड ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी समारोह में 20 हजार करोड़ से ज्यादा के एमओयू साइन होने हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां इस समारोह में शामिल हो रही हैं। जबरन कंपनियों को नहीं लाया जा सकता है। बिना पैकेज व शर्तों के कई कंपनियां हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए तैयार हैं। - बिक्रम सिंह, उद्योग मंत्री, हिमाचल सरकार

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