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हिमाचल: आदेशों की अनुपालना नहीं करने पर सीयू के कुलपति व रजिस्ट्रार तलब, जानें हाईकोर्ट के बड़े फैसले

Tue, 06 May 2025 10:24 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 06 May 2025 10:24 AM IST
सार

 न्यायाधीश तरलोक सिंह चाैहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि दो दिन के भीतर कोर्ट के फैसले की अनुपालना न करने पर क्यों न इनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

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CU Vice Chancellor and Registrar summoned for not complying with orders, know other decisions of Himachal Hig
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना न करने पर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति व रजिस्ट्रार को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होने के आदेश दिए गए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चाैहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि दो दिन के भीतर कोर्ट के फैसले की अनुपालना न करने पर क्यों न इनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। अदालत ने कहा है कि न्यायालय की ओर से 6 जनवरी 2020 को जो निर्णय दिया गया है, उसकी अनुपालना की जाए। मामले को सुनवाई के लिए 7 मई को रखा गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि जीपीएफ नियम के मुताबिक उन्हें ब्याज दिया जाए, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें बैंक की दरों पर ब्याज दिया गया।
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हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की जारी वरिष्ठता सूची को ठहराया सही
 हिमाचल हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी वरिष्ठता सूची को यूजीसी के नियमों के तहत सही ठहराया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि संबंधित उम्मीदवारों की चयन समिति की सिफारिशें करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति के लिए पात्रता की यूजीसी ओर से तैयार यूजीसी विनियम के तहत की गई है। अदालत ने पाया कि वर्ष 15 सितंबर, 2020 की वरिष्ठता सूची यूजीसी विनियमों और कानूनों और अध्यादेश के अनुरूप की गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की धारा 10 और 10.1 विनियम, 2010 में प्रत्यक्ष नियुक्ति के लिए पिछली सेवा की गणना करने का स्पष्ट प्रावधान है। सीएएस के तहत भर्ती और पदोन्नति में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि पिछली नियमित सेवा, चाहे राष्ट्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय हो। सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर के रूप में या विश्वविद्यालय, कॉलेज, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं या अन्य में समकक्ष वैज्ञानिक पेशेवर संगठन यानी सीएसआईआर, आईसीएआर, डीआरडीओ, यूजीसी, आईसीएसएसआर, आईसीएचआर, आईसीएमआर, डीबीटी आदि को सीधी भर्ती के लिए गिना जाना चाहिए। सीएएस के तहत पदोन्नति बशर्ते पदधारी के पास योग्यता हो। यूजीसी के तहत सहायक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए निर्धारित योग्यता उम्मीदवार के पास होनी चाहिए।

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गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में 19 मई को होगी बहस
गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में 19 मई को बहस होगी। इस मामले में जिला अदालत शिमला ने अनिल उर्फ नीलू को दोषी करार दिया है। आरोपी ने जिला अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है। वर्ष 2017 में जुलाई महीने में जिला शिमला के कोटखाई में गुड़िया (काल्पनिक नाम) स्कूल से जब घर की तरफ लौट रही थी तो उसके साथ कुछ लोगों ने दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। आक्रोश में प्रदेशभर की जनता भड़क गई थी। एक साल बाद सीबीआई ने नीलू को गिरफ्तार किया था। 

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कोर्ट ने पूछा-33 लोगों की याचिका कैसे कर सकती पूरे है क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षेत्र के हाटी समुदाय को जनजाति दर्जा बना रहे, इसे लेकर भाट समुदाय के 33 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार की ओर से जो जनजाति दर्जा दिया गया है, वह बना रहे। इससे समाज के बहुत सारे लोगों को फायदा होगा। इसी पर न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने पूछा कि कैसे 33 लोगों की ओर से दायर याचिका पूरे क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व कर सकती है। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि वह इस पर अपना पूरा हलफनामा दायर करेंगे, जिसमें यह बताया जाएगा कि जिन 33 लोगों ने याचिका दायर की है, वह संपूर्ण समुदाय से चुने गए हैं। अदालत में हाटी दर्जे से जुड़ीं सभी याचिकाओं पर 2 जून को सुनवाई होगी। किन्नौर संगठन की ओर से भी इसे लेकर एक याचिका दायर की गई है। अदालत ने पिछली सुनवाई के दौरान सभी पार्टियों को जवाब और प्रत्युत्तर देने को कहा है।

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